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MP News: 1100-year-old Mala Devi Jain Temple to undergo reconstruction; ASI to carry out resetting without adding any new stone.
विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के ग्यारसपुर की पहाड़ी पर स्थित करीब 1100 वर्ष पुराने प्रतिहारकालीन माला देवी जैन मंदिर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) पुनर्निर्माण कराएगा। खास बात यह है कि इस ऐतिहासिक मंदिर के पुनर्निर्माण में न तो उसका मूल स्वरूप बदला जाएगा और न ही कोई नया पत्थर लगाया जाएगा। मंदिर के प्रत्येक स्तर के पत्थरों को सावधानीपूर्वक निकालकर उनकी नंबरिंग की जाएगी। इसके बाद उन्हीं पत्थरों को निर्धारित क्रम में फिर से जोड़कर मंदिर का निर्माण किया जाएगा।
पुरातत्व विभाग की भाषा में इस प्रक्रिया को ‘रीसेटिंग’ यानी मंदिर को खोलकर दोबारा बांधना कहा जाता है। मध्य प्रदेश में पहली बार किसी मंदिर के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए दिसंबर 2026 के अंत या जनवरी 2027 में निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। मंदिर को दो से ढाई साल में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की टीम तैनात की जाएगी। इसमें आर्कियोलॉजिस्ट, आर्कियोलॉजिकल इंजीनियर, कंजर्वेशन आर्किटेक्ट और सर्वेयर शामिल होंगे। टीम की निगरानी में मंदिर के पत्थरों को एक-एक करके निकाला जाएगा और उनकी नंबरिंग की जाएगी, ताकि दोबारा निर्माण के दौरान उन्हें उसी क्रम और स्थान पर लगाया जा सके।
जर्जर हालत के कारण माला देवी जैन मंदिर लंबे समय से पर्यटकों के लिए बंद है। मंदिर की भौगोलिक स्थिति भी पुनर्निर्माण के काम को चुनौतीपूर्ण बनाती है। मंदिर के तीन ओर करीब 50 से 60 फीट गहरी खाई है। ऐसे में निर्माण कार्य के लिए नीचे से मंच तैयार करना भी आसान नहीं होगा।
माला देवी जैन मंदिर के इतिहास का उल्लेख 850 से 885 ईस्वी के बीच के कलचुरीकालीन शिलालेख में मिलता है। इसमें ग्यारसपुर क्षेत्र के शासकीय प्रशासक वल्लेक के शासनकाल का संदर्भ दिया गया है। यह शिलालेख वर्तमान में ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित है। ऐतिहासिक महत्व के इस मंदिर को मूल स्वरूप में संरक्षित रखने के उद्देश्य से ASI रीसेटिंग तकनीक से इसका पुनर्निर्माण कराने जा रहा है।