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MP News: Madhya Pradesh High Court launches country's first 'Integrated Digital Justice Model'
भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शनिवार को देश का पहला ‘यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल’ लॉन्च किया। इस नई व्यवस्था के तहत पुलिस, अदालत, जेल, फॉरेंसिक और मेडिकल सिस्टम के डिजिटल प्लेटफॉर्म को आपस में रियल टाइम में जोड़ दिया गया है। इससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और कई प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल हो जाएंगी।
जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा सहित सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई न्यायाधीश मौजूद रहे।
10 मिनट में संभव होगी कैदी की रिहाई
नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद जमानत आदेश जारी होते ही संबंधित जानकारी सीधे जेल प्रशासन तक पहुंचेगी। ई-प्रिजन सॉफ्टवेयर को अदालतों के सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे रिमांड वारंट, जमानत आदेश, सजा वारंट और रिहाई निर्देश तुरंत डिजिटल रूप से ट्रांसफर होंगे। अब तक जमानत के बाद रिहाई में घंटों या कई बार दिनों का समय लग जाता था, लेकिन नई प्रणाली में यह प्रक्रिया 10 मिनट के भीतर पूरी हो सकेगी।
वॉट्सएप और ईमेल पर मिलेंगे कोर्ट आदेश
अब अदालतों के आदेश और प्रमाणित कॉपी लेने के लिए लोगों को कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। फीस जमा होते ही आदेश और सर्टिफाइड कॉपी सीधे वॉट्सएप और ईमेल पर भेजी जाएगी। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। लोग केस की जानकारी और दस्तावेजों के लिए ऑनलाइन आवेदन भी कर सकेंगे।
एआई तैयार करेगा केस की समरी
नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक का भी उपयोग किया गया है। बड़े और जटिल मामलों की ऑटो-समरी एआई के जरिए तैयार होगी, जिससे जजों और वकीलों को लंबी फाइलें पढ़ने में कम समय लगेगा। इससे सुनवाई प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
पुलिस, कोर्ट और जेल सिस्टम रहेंगे आपस में जुड़े
डिजिटल इंटीग्रेशन के जरिए पुलिस, अदालत और जेल विभाग के रिकॉर्ड एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे। इससे दस्तावेज गुम होने, फाइल अटकने और प्रक्रिया में अनावश्यक देरी जैसी समस्याओं में कमी आएगी। गवाहों और पक्षकारों को केस से जुड़ी अपडेट सीधे मोबाइल और वॉट्सएप पर मिल सकेगी।
सबूतों से छेड़छाड़ रोकने में मिलेगी मदद
फॉरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट सीधे डिजिटल सिस्टम पर अपलोड होंगी, जिससे रिकॉर्ड बदलने या गायब होने की आशंका कम होगी। नई व्यवस्था में प्रत्येक आरोपी की एक यूनिक डिजिटल पहचान बनाई जाएगी, जिससे ट्रैकिंग और निगरानी आसान होगी।
42 लाख से अधिक ई-समन भेजे गए
हाई कोर्ट के अनुसार इस प्लेटफॉर्म के जरिए अब तक 42 लाख से अधिक ई-समन और नोटिस डिजिटल रूप से भेजे जा चुके हैं। माना जा रहा है कि यह मॉडल देश की न्याय व्यवस्था में तकनीकी बदलाव का बड़ा उदाहरण बनेगा।