

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Major Supreme Court order: Interim stay on sharing recordings of judicial proceedings on social media.
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने बिना पूर्व अनुमति के न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड, प्रसारित, री-पोस्ट, ट्रांसमिट, मॉनेटाइज, संशोधित, संग्रहित या होस्ट करने पर रोक लगा दी है।
यह आदेश तीन न्यायाधीशों की पीठ ने पारित किया। पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. विकास सिंह सहित अन्य अधिवक्ताओं ने याचिकाकर्ता हर्षिता ग्रोवर की ओर से पैरवी की। अदालत ने सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किए।
मामले में केंद्र सरकार सहित विभिन्न पक्षों को शामिल किया गया है। याचिका में कई हाईकोर्टों को भी पक्षकार बनाने का अनुरोध किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश, इलाहाबाद, बॉम्बे, कलकत्ता, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई हाईकोर्टों को मामले में पक्षकार बनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को भी प्रतिवादी क्रमांक 12 के रूप में शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित हाईकोर्टों से यह जानकारी मांगी है कि न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तैयार किए गए मॉडल नियमों को उन्होंने किस हद तक अपनाया है।
इसके अलावा अदालत ने लगातार और निर्बाध लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवहारिकता तथा उसके प्रभाव को लेकर भी संबंधित हाईकोर्टों से स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
अंतरिम व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल या प्रसारण संबंधित प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
इसके तहत रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल, प्रसारित, अपलोड, ट्रांसमिट, संशोधित, संग्रहित या होस्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल अथवा संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
यह अंतरिम आदेश 24 जुलाई 2026 को हर्षिता ग्रोवर की रिट याचिका (सिविल) संख्या 751/2026 की सुनवाई के दौरान पारित किया गया था।
अदालत का यह कदम न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के अनधिकृत इस्तेमाल और उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसार को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया है। इस आदेश का असर मान्यता प्राप्त समाचार संगठनों द्वारा न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर नहीं पड़ेगा।
इसका मतलब है कि अधिकृत और मान्यता प्राप्त समाचार माध्यम पहले की तरह अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकेंगे। अंतरिम रोक मुख्य रूप से न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के बिना अनुमति डिजिटल इस्तेमाल और प्रसार पर लागू होगी।
अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत डिजिटल इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना है। जब तक मामले में आगे कोई निर्देश नहीं आता, संबंधित रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने अथवा अन्य तरीके से इस्तेमाल करने से पहले निर्धारित प्राधिकरण की अनुमति लेना आवश्यक होगा।