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Major accident averted on Kharun River bridge; speeding bus crashes through divider and mounts the railing... over 20 passengers were on board.
रायपुर। दुर्ग की ओर जा रही एक तेज रफ्तार यात्री बस खारुन नदी के पुल पर अनियंत्रित होकर रेलिंग पर जा चढ़ी। बस पहले पुल के डिवाइडर से टकराई और इसके बाद उसका अगला हिस्सा रेलिंग में अटक गया। बस नदी में गिरने से बाल-बाल बची। हादसे के समय बस में 20 से ज्यादा यात्री सवार थे। गनीमत रही कि सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकल आए।
घटना दुर्ग जिले की सीमा से लगे खारुन नदी पुल की बताई जा रही है। पायल बस रायपुर से दुर्ग की तरफ जा रही थी। इसी दौरान तेज रफ्तार के कारण चालक का बस पर नियंत्रण बिगड़ गया और बस पुल के डिवाइडर से जा टकराई।टक्कर के बाद बस का अगला हिस्सा पुल की रेलिंग पर चढ़ गया। रेलिंग में बस अटक जाने के कारण वह सीधे नदी में गिरने से बच गई। हादसे के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
हादसे की जगह रायपुर और दुर्ग जिले की सीमा के पास होने के कारण पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि दोनों जिलों की पुलिस घटना की जिम्मेदारी एक-दूसरे के क्षेत्र में होने की बात कह रही है।घटना के बाद शुक्रवार शाम तक एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने नहीं आई थी। हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू होने की स्थिति भी स्पष्ट नहीं थी।
जिस तरह बस पुल की रेलिंग पर जाकर अटकी, उससे हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। बस कुछ दूरी और आगे बढ़ती तो उसके खारुन नदी में गिरने का खतरा था। बड़ी संख्या में यात्रियों के सवार होने के कारण स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
इसी बीच उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर अब तक की कार्रवाई की जानकारी देने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि एसी स्लीपर बसों की नियमित जांच और सुरक्षा व्यवस्था को गंभीरता से लागू किया जाना जरूरी है। चालकों और परिचालकों को आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया।कोर्ट के समक्ष बसों के लिए निर्धारित एआइएस-052, एआइएस-119 और एआइएस-135 जैसे सुरक्षा मानकों का भी उल्लेख किया गया। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी दुर्घटनाग्रस्त बस में अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया जाता है, तो चालक और परिचालक के साथ लाइसेंसधारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
हाई कोर्ट के समक्ष मुख्य सचिव ने रात के समय विशेष जांच अभियान चलाने का आश्वासन दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार से पिछले तीन वर्षों में जारी बस परमिट, जांच व्यवस्था, सीमा जांच चौकियों, यात्री सुरक्षा जांच और आपराधिक कार्रवाई से संबंधित विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।