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Major decision ahead of the NEET-UG exam: Delhi High Court approves a temporary ban on Telegram, terming the government's action justified.
नई दिल्ली। नीट यूजी की दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा से ठीक पहले मैसेजिंग प्लेटफार्म टेलीग्राम पर केंद्र सरकार द्वारा लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध अब न्यायिक मंजूरी भी हासिल कर चुका है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले को उचित ठहराते हुए टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार जरूरत पड़ने पर पूरे डिजिटल प्लेटफार्म तक पहुंच सीमित करने का अधिकार रखती है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इस तरह के आदेशों का उल्लंघन किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सात वर्ष तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान भी लागू हो सकता है।
न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि सरकार ने टेलीग्राम पर स्थायी नहीं बल्कि सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया है। अदालत के अनुसार प्लेटफार्म पर 22 जून तक रोक रहेगी, जबकि मैसेज एडिट करने की सुविधा 30 जून तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने माना कि सरकार ने अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए सबसे कम प्रतिबंधात्मक विकल्प अपनाया है, इसलिए इस कार्रवाई को मनमाना या जरूरत से ज्यादा कठोर नहीं कहा जा सकता।
केंद्र सरकार ने अदालत में दलील दी कि नीट यूजी परीक्षा से पहले पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्र और भ्रामक संदेशों के तेजी से प्रसार को रोकना बेहद जरूरी था। सरकार के मुताबिक टेलीग्राम पर बड़ी संख्या में चैनल और ग्रुप सक्रिय हैं, जिनके जरिए कुछ ही समय में लाखों लोगों तक सामग्री पहुंच जाती है। ऐसे में परीक्षा संबंधी अफवाहें और गैरकानूनी सामग्री सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि टेलीग्राम का दुरुपयोग लगातार बढ़ रहा है और यह कई मामलों में अपराधियों तथा आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए भी उपयोगी मंच बनता जा रहा है। सरकार के अनुसार पेपर लीक से जुड़ी सामग्री फैलाने में भी इस प्लेटफार्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि टेलीग्राम पर मौजूद बॉट सिस्टम और मिरर चैनल जैसी सुविधाएं किसी भी सामग्री को बेहद तेजी से फैलाने में सक्षम हैं। अदालत ने माना कि यदि किसी एक चैनल को हटाया भी जाए तो उसकी प्रतिलिपि के रूप में दूसरे चैनल सक्रिय हो जाते हैं, जिससे गैरकानूनी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि सरकार की ओर से उठाया गया कदम परिस्थितियों के अनुरूप उचित माना गया।
टेलीग्राम की ओर से अदालत में कहा गया कि सरकार ने पूरे प्लेटफार्म पर रोक लगाने का फैसला बिना पर्याप्त आधार के लिया है। कंपनी का तर्क था कि कानून में केवल विशेष सामग्री या जानकारी को ब्लॉक करने का प्रावधान है, पूरे प्लेटफार्म को बंद करना उचित नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि भारत में उसके करीब 15 करोड़ उपयोगकर्ता हैं और इस तरह का प्रतिबंध उनके संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करता है।
इधर, नीट यूजी परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की सुविधा के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने विशेष ट्रेनों के संचालन की घोषणा की है। 20 और 21 जून को कोरबा और दुर्ग के बीच विशेष मेमू ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसके अलावा 21 जून को छिंदवाड़ा-इतवारी पैसेंजर स्पेशल भी संचालित होगी, जबकि हसदेव एक्सप्रेस का अस्थायी विस्तार दुर्ग तक किया गया है।