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Uproar over theft of offerings at Ram Mandir; Nripendra Misra says the time has come for major changes in the entire management.
नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में दानपात्रों से चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने स्पष्ट कहा है कि अब केवल छोटी-मोटी सुधारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे प्रबंधन ढांचे का व्यापक पुनर्गठन जरूरी हो गया है। उनका मानना है कि मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी अब अनुभवी और पेशेवर लोगों को सौंपी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताएं केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं हैं, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उनके मुताबिक इस घटना ने मंदिर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही की प्रक्रिया में मौजूद गंभीर कमियों को उजागर कर दिया है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखी है। उनका मानना है कि वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर उसे पूरी तरह नए सिरे से तैयार किया जाना चाहिए।
पूर्व आईएएस अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव रहे नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि फिलहाल मंदिर के अधिकांश कार्य स्वयंसेवकों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार कार्य करने वालों को मौखिक रूप से जिम्मेदारियां बता दी जाती हैं, लेकिन न तो स्पष्ट लिखित आदेश हैं और न ही तय जवाबदेही की कोई मजबूत व्यवस्था मौजूद है।उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में लगभग 1500 लोग विभिन्न कार्यों से जुड़े हुए हैं, लेकिन जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और व्यवस्थित कार्य विभाजन नहीं होने के कारण ऐसी घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 से 2025 के बीच जारी उन दस्तावेजों का अध्ययन किया है, जिनमें दानपात्रों से प्राप्त धनराशि के संग्रहण और गिनती के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी निर्धारित की गई थी। उनका कहना है कि यदि इन दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया होता तो आज इस तरह के विवाद की नौबत शायद नहीं आती।
राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है। दूसरी ओर मंदिर ट्रस्ट ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इन्कार करते हुए कहा है कि मंदिर के सभी खातों का नियमित ऑडिट कराया जाता है और अब तक किसी तरह की वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई है।
यह पूरा मामला केवल चढ़ावे की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक की प्रशासनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। अब सभी की नजर एसआईटी जांच और भविष्य में मंदिर प्रबंधन में किए जाने वाले संभावित सुधारों पर टिकी हुई है।