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Supreme Court's strong message: Roads are not just for vehicles; pedestrians' rights also affirmed.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने वालों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि फुटपाथ पर सुरक्षित तरीके से चलना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सड़क का निर्माण किया जाता है तो उसके साथ व्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम फुटपाथ भी होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से पैदल यात्रियों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा के लिए अलग कानून बनाने की संभावना पर विचार करने को भी कहा है।
अदालत ने कहा कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था केवल वाहनों तक सीमित नहीं रह सकती। शहरों में विकास योजनाएं इस तरह तैयार होनी चाहिए कि पैदल यात्रियों को भी बराबर महत्व मिले और उन्हें बिना किसी खतरे के आवाजाही का अवसर मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, नगरपालिकाएं और पंचायतें अपने क्षेत्रों में फुटपाथों का निर्माण, रखरखाव और संरक्षण सुनिश्चित करें। फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखना भी स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी होगी, ताकि लोगों को सड़क पर उतरकर चलने की मजबूरी न हो।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इंसान ने चलना पहिए के आविष्कार से बहुत पहले सीखा था, लेकिन आज की व्यवस्था में पैदल यात्रियों के अधिकार पीछे छूट गए हैं। कई स्थानों पर वाहन चालकों का दबाव इतना बढ़ गया है कि फुटपाथ भी सुरक्षित नहीं रह गए। अदालत ने इस सोच को बदलने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि शहरों की योजना में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
फुटपाथों की गुणवत्ता, सुरक्षा और रखरखाव को बेहतर बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रभावी नियामक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता भी जताई। अदालत का मानना है कि स्पष्ट निगरानी तंत्र बनने से फुटपाथों का निर्माण तय मानकों के अनुसार होगा और उनकी नियमित देखरेख भी सुनिश्चित हो सकेगी।
यह टिप्पणी सड़क दुर्घटना में एक पांच वर्षीय छात्र की मौत से जुड़े मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान की गई। अदालत ने मुआवजा बढ़ाते हुए कहा कि सड़कों पर सुरक्षित पैदल चलने का अधिकार जीवन और गरिमा से जुड़ा मूल अधिकार है, इसलिए सरकार और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों के लिए सुरक्षित फुटपाथ उपलब्ध कराएं।
सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। हाल के वर्षों में देशभर में बड़ी संख्या में पैदल यात्रियों की सड़क हादसों में मौत हुई है। कुल सड़क दुर्घटना मृतकों में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी पैदल यात्रियों की है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि सुरक्षित फुटपाथ और बेहतर पैदल यात्री सुविधाएं विकसित की जाएं तो ऐसे हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का उद्देश्य केवल फुटपाथ बनवाना नहीं, बल्कि शहरों के विकास की सोच बदलना है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आधुनिक शहरी विकास तभी सार्थक होगा, जब सड़कों पर वाहनों के साथ पैदल चलने वालों की सुरक्षा और अधिकारों को भी समान महत्व दिया जाए।