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Major relief through the Chief Minister's Electricity Bill Settlement Scheme: ₹700 crore in outstanding dues waived, ₹72 crore recovered.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना (एमबीबीएस) के तहत लाखों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। अब तक इस योजना के माध्यम से करीब 700 करोड़ रुपए की बकाया राशि और सरचार्ज में छूट दी जा चुकी है, जबकि बिजली वितरण कंपनी को 72 करोड़ रुपए की मूल बकाया राशि प्राप्त हुई है। योजना 30 जून तक निर्धारित थी, लेकिन राज्य सरकार इसे दो से तीन महीने तक बढ़ाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी इसके संकेत दिए हैं और जल्द ही विस्तार संबंधी आदेश जारी होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना की शुरुआत 12 मार्च को की गई थी। इसमें सरकारी संस्थानों और उच्च दाब उपभोक्ताओं को छोड़कर घरेलू, बीपीएल और कृषि श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं को शामिल किया गया। योजना लागू होने के समय प्रदेश में करीब 8.99 लाख बकायादार थे, जिन पर कुल 1,363.87 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया था।योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि बकाया बिल पर लगने वाला 100 प्रतिशत सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया। इससे बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ उठाते हुए अपना मूल बकाया जमा कराया।
बिजली कंपनी के अनुसार अधिकांश उपभोक्ताओं के बकाया बिल में मूल राशि से अधिक सरचार्ज जुड़ चुका था। सरचार्ज पूरी तरह माफ होने के बाद लोगों ने तेजी से पंजीयन कराया और किस्तों में भी बकाया राशि का भुगतान शुरू किया। अब तक कंपनी को 72 करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है, जबकि सरचार्ज और अन्य रियायतों के रूप में 700 करोड़ रुपए से अधिक की छूट दी गई है।
इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा बड़े बकायादारों को मिला। कई मामलों में सरचार्ज मूल राशि से कई गुना अधिक हो चुका था। उदाहरण के तौर पर आईएएस एसोसिएशन पर 61 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया था, जिसमें 41 लाख रुपए केवल सरचार्ज था। योजना के तहत सरचार्ज माफ होने के बाद एसोसिएशन ने मूल बकाया राशि का भुगतान कर दिया।
हालांकि बिजली कंपनी का कहना है कि कृषि उपभोक्ताओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है। निर्धारित सीमा से अधिक बिजली खपत करने वाले कई उपभोक्ताओं ने अभी तक योजना का पर्याप्त लाभ नहीं उठाया है।
जहां घरेलू और अन्य उपभोक्ताओं से वसूली अभियान जारी है, वहीं सरकारी विभागों से बकाया राशि की वसूली अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। विभिन्न सरकारी विभागों पर करीब 2,900 करोड़ रुपए का बिजली बिल लंबित है। बिजली कंपनी कई बार विभागों को नोटिस और पत्र भेज चुकी है, लेकिन अपेक्षित भुगतान नहीं हो सका है।सरकार की ओर से सरकारी बिजली कनेक्शनों को प्रीपेड प्रणाली से जोड़ने की योजना भी अभी पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बावजूद कई विभाग समय पर प्रीपेड रिचार्ज नहीं करा रहे हैं।
बिजली कंपनी का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना की अवधि बढ़ाई जाती है तो बड़ी संख्या में शेष बकायादार भी इसका लाभ उठाकर अपने लंबित बिजली बिल का निपटारा कर सकेंगे। इससे उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलने के साथ बिजली कंपनी की राजस्व वसूली में भी सुधार होगा।