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Major scam involving farmers' funds in cooperative banks
रायपुर : प्रदेश की सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में किसानों से जुड़ी राशि की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य के सात सहकारी बैंकों की अलग-अलग शाखाओं में करीब 60 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन सामने आया है। जांच के दौरान किसानों के कर्ज, खाद-बीज और बैंक में जमा होने वाली रकम में हेराफेरी के कई मामले पकड़े गए हैं। इन मामलों में 50 क्लर्क, लिपिक, लेखापाल और कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ 13 शाखा प्रबंधक या प्रभारी शाखा प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
अंबिकापुर की सात शाखाओं में सबसे बड़ी गड़बड़ी
जांच में सबसे बड़ी रकम जिला सहकारी बैंक अंबिकापुर की सात शाखाओं में सामने आई है। यहां करीब 32.61 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जांच चल रही है। इसके बाद छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक की बरमकेला शाखा का मामला सामने आया है, जहां करीब 18.13 करोड़ रुपये के गबन की बात सामने आई है।इसके अलावा जिला सहकारी बैंक रायपुर की छह शाखाओं में 5.66 करोड़ रुपये, दुर्ग की दो शाखाओं में 2.11 करोड़ रुपये, बिलासपुर की तीन शाखाओं में 28 लाख रुपये, राजनांदगांव की चार शाखाओं में 18 लाख रुपये और जगदलपुर की कोंडागांव शाखा में करीब 30 हजार रुपये की वित्तीय गड़बड़ी की जांच की जा रही है।
कर्ज से लेकर खाद-बीज की रकम तक में हेराफेरी
जांच में गड़बड़ी के कई तरीके सामने आए हैं। कुछ मामलों में किसानों से कर्ज की राशि वसूलने के बाद उसे बैंक में जमा नहीं किया गया। कहीं दूसरे व्यक्ति के नाम पर ऋण लेने की शिकायत मिली, तो कुछ मामलों में खाद और बीज के नाम पर नकद राशि निकालने की बात सामने आई है। बैंक शाखाओं में कैश शॉर्टेज यानी नकदी की कमी भी जांच का हिस्सा बनी है।
63 कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई
गड़बड़ी सामने आने के बाद 50 क्लर्क, लिपिक, लेखापाल और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसके अलावा 13 शाखा प्रबंधक और प्रभारी शाखा प्रबंधक भी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। कुछ कर्मचारियों को उनके पद से हटाया गया है, जबकि कई मामलों में विभागीय जांच के साथ पुलिस कार्रवाई भी चल रही है।
करोड़ों के गबन के बाद निगरानी व्यवस्था पर सवाल
करीब 60 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल बैंक शाखाओं की निगरानी और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था को लेकर है। करोड़ों रुपये की गड़बड़ी लंबे समय तक कैसे चलती रही और इसकी जानकारी समय रहते उच्च अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कार्रवाई का बड़ा हिस्सा निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहने से भी निगरानी तंत्र की भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। 13 शाखा प्रबंधकों पर कार्रवाई हुई है, लेकिन जांच का दायरा उन अधिकारियों तक कितना पहुंचेगा जो बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार हैं, यह महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है।
ईओडब्ल्यू और पुलिस कर रही मामलों की जांच
अंबिकापुर और बरमकेला समेत कुछ अन्य सहकारी बैंक शाखाओं में हुई वित्तीय गड़बड़ी की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी ईओडब्ल्यू को सौंपी गई है। वहीं कुछ मामलों में संबंधित थानों में भी प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियां गबन की रकम, जिम्मेदार लोगों और पूरे वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं।
मंत्री बोले- दोषियों पर की जा रही कार्रवाई
सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि जांच में जो लोग दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। अब जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस पूरे मामले में केवल शाखा स्तर के कर्मचारी जिम्मेदार थे या निगरानी और नियंत्रण की भूमिका निभाने वाले अधिकारी भी जवाबदेही के दायरे में आएंगे।