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Message on cybersecurity reaches 1.70 crore people in Chhattisgarh.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और लोगों को डिजिटल ठगी से बचाने के लिए चलाए गए सात सप्ताह के साइबर जागृति अभियान के तहत 1.70 करोड़ से अधिक लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया गया। इस दौरान प्रदेशभर में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि सोशल मीडिया पर अभियान से जुड़ी पोस्ट को 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज मिले। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने साइबर जागरूकता को जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शुक्रवार को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के अभिनंदन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने साइबर जागरूकता के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले जिलों और ट्रैफिक हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया।
साइबर जागृति अभियान की शुरुआत जारी रहेगी: मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया अभियान ने देश में बड़े बदलाव किए हैं। आज गांवों में रहने वाले लोग भी मोबाइल के माध्यम से डिजिटल भुगतान कर रहे हैं और तकनीक से जुड़ रहे हैं। हालांकि, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार के साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। कई बार तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी ठगी के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में लोगों को साइबर अपराधों के तरीकों और उनसे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सात सप्ताह का अभियान समाप्त जरूर हुआ है, लेकिन साइबर जागरूकता की मुहिम आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से इस दिशा में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
सात सप्ताह में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम, 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंच
छत्तीसगढ़ पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों के समन्वय से साइबर जागृति अभियान चलाया। इसके तहत सात अलग-अलग विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
अभियान में डिजिटल सुरक्षा, वित्तीय धोखाधड़ी और यूपीआई सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार के नाम पर ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक संकल्प जैसे विषयों को शामिल किया गया।
स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को बताया गया कि ओटीपी और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और फर्जी निवेश योजनाओं के झांसे में न आएं।

अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और 5 लाख से अधिक सेल्फी के माध्यम से लोगों की भागीदारी दर्ज की गई। इस पहल से लगभग 1 करोड़ 70 लाख लोगों तक साइबर अपराधों से बचाव का संदेश पहुंचा।
सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज
साइबर जागृति अभियान को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप पर साइबर सुरक्षा से जुड़ी सामग्री साझा की गई।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से अभियान के दौरान 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं। इन पोस्ट को 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज मिले। इसके अलावा, अभियान में युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ के रूप में जोड़कर परिवारों और समाज तक जागरूकता पहुंचाने की पहल की गई।

पुलिस ने लोगों से अपील की कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर अपराधों पर कार्रवाई से एफआईआर में कमी: विजय शर्मा
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में होता है। डिजिटल भुगतान ने आम लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों से सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ अपराधियों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई कर रही है। साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों को खोलने में संलिप्त बैंककर्मियों और फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
विजय शर्मा के अनुसार, इन प्रयासों से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी की राशि की रिकवरी दर में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जागरूकता और सख्त कार्रवाई दोनों जरूरी हैं।
इन जिलों को साइबर जागरूकता के अभिनव प्रयासों के लिए मिला सम्मान
अभियान के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों ने स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरीके अपनाकर लोगों को जागरूक किया।
मुंगेली: विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई।
गरियाबंद: मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को जागरूक कर परिवारों तक संदेश पहुंचाने की पहल की गई।
दुर्ग: ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों और अन्य गतिविधियों से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया।
रायपुर: साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इनके माध्यम से लगभग दो लाख लोगों तक संदेश पहुंचने का अनुमान है।
जांजगीर-चांपा: ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के जरिए लगभग 1 लाख 61 हजार लोगों तक जागरूकता पहुंचाई गई।
बिलासपुर: आकाशवाणी के विशेष फोन-इन कार्यक्रम के माध्यम से लगभग आठ लाख श्रोताओं तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा।
समारोह में इन प्रयासों के लिए संबंधित जिलों को सम्मानित किया गया।
रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने युवाओं ने दिए सुझाव
समारोह में ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के प्रतिभागियों के प्रयासों की भी सराहना की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण यातायात प्रबंधन की चुनौतियां बढ़ रही हैं। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी जरूरी है।
हैकाथॉन के प्रतिभागियों ने टाटीबंध चौक, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, आमापारा चौक, लोधीपारा चौक और शंकर नगर सहित प्रमुख यातायात दबाव वाले क्षेत्रों का अध्ययन किया। युवाओं ने पार्किंग प्रबंधन, सुरक्षित पैदल मार्ग, लेन मार्किंग और यातायात जाम कम करने के उपाय सुझाए।
ट्रैफिक हैकाथॉन के ओवरऑल विजेता कार्तिकेय पंत ने शंकर नगर टर्निंग पॉइंट की व्यवस्था सुधारने के लिए ‘टैक्टिकल अर्बनिज्म’ आधारित मॉडल प्रस्तुत किया। इसमें सड़क क्षेत्र का बेहतर उपयोग, स्पष्ट लेन मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान और स्ट्रीट वेंडरों तथा ऑटोरिक्शा चालकों के लिए व्यवस्थित जगह तय करने जैसे सुझाव शामिल थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और उपयोगी तथा व्यावहारिक समाधानों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
एआई से ट्रैफिक जाम की पहचान, एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर का प्रस्ताव
हैकाथॉन में युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के सुझाव भी दिए। ‘रायपुर नेत्र’ और ‘दृष्टि’ जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम से सीसीटीवी कैमरों और एआई की मदद से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान, जाम की पूर्व सूचना और एंबुलेंस तथा अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने की परिकल्पना प्रस्तुत की गई।
आयोजन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर और द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर ने तकनीकी सहयोग दिया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रस्तावों की तकनीकी व्यवहार्यता, उपयोगिता और क्रियान्वयन की संभावनाओं का दो चरणों में मूल्यांकन किया।
मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के जरिए उन क्षेत्रों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जहां पहले बसें नहीं चलती थीं।
उन्होंने बताया कि बस्तर सहित दूरस्थ और पूर्व में नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में ऐसे मार्गों पर 100 से अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जहां आर्थिक लाभ कम होने के कारण पहले परिवहन सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं। सरकार ने इन मार्गों पर जनहित को प्राथमिकता देते हुए बस संचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई की व्यवस्था की है।
कार्यक्रम में विधायक राजेश मूणत ने कहा कि रायपुर की यातायात व्यवस्था को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ काम करना होगा। समारोह में महापौर मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।