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Midnight raid on food factory following complaint about the production of fake paneer; 300 kg of paneer seized.
रायपुर। भलेसर रोड स्थित वैद्य फूड फैक्ट्री में कथित तौर पर एनालॉग पनीर बनाए जाने की शिकायत पर रविवार देर रात राजस्व, खाद्य एवं औषधि प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। करीब तीन घंटे चली कार्रवाई के दौरान टीम ने लगभग 300 किलो पनीर जब्त किया है। पनीर के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और उसकी गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर नमूना जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर भेजा गया है।
तहसीलदार जुगल किशोर, नायब तहसीलदार हरीश ध्रुव, खाद्य सुरक्षा अधिकारी शंखनाद भोई और पुलिस टीम रात करीब 12 बजे फैक्ट्री पहुंची। जांच के दौरान फैक्ट्री में मध्यरात्रि के समय पनीर का निर्माण होता पाया गया।
टीम ने मौके पर पनीर के साथ निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और पूरी प्रक्रिया की जांच की। अधिकारियों ने आवश्यक जानकारी दर्ज करने के बाद खाद्य सामग्री को नियमानुसार सील कर दिया।
अगली सुबह कोल्ड स्टोरेज खोलकर वहां रखी सामग्री की जांच की गई और पनीर के सैंपल लिए गए। अब प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अभिहित अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि फैक्ट्री से लिए गए नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। लैब रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के मुताबिक जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर लगातार प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। 1 अप्रैल 2025 से 17 अगस्त 2026 तक 149 प्रवर्तन नमूने लिए गए और 29 प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें 9 मामलों में कुल 16.66 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। वहीं तीन प्रकरणों में अपराधों के शमन के लिए 40,100 रुपये जमा कराए गए। नियमों के उल्लंघन के चलते पांच खाद्य पदार्थों की जिले में बिक्री पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 17 से 23 अगस्त तक ‘बने खाबो, बने रहिबो 2.0’ अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान मिठाई, बेकरी, नमकीन समेत अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता, निर्माण प्रक्रिया, भंडारण, लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी।
विभाग ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे अधिकृत दुकानों और प्रतिष्ठानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें। पैकेज्ड खाद्य पदार्थ लेते समय निर्माण तिथि, अंतिम उपयोग तिथि और लाइसेंस या पंजीयन की जानकारी जरूर जांचें।