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Mohan Bhagwat said—the Sangh is made up of its volunteers, but the Sangh is greater than them.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों के बिना संघ की कल्पना नहीं की जा सकती, लेकिन संघ का दायरा किसी एक स्वयंसेवक से बड़ा है। उन्होंने संघ की तुलना समुद्र से करते हुए कहा कि जिस तरह समुद्र की पहचान उसकी बूंदों से होती है, उसी तरह स्वयंसेवक संघ की पहचान बनाते हैं। संघ का मूल उद्देश्य राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना है, इसलिए सभी सदस्यों को संगठित और सजग रहकर काम करना चाहिए।डॉ. भागवत गुरुवार को बिलासपुर के कोनी स्थित सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि संघ को केवल हिंदुओं के हित में काम करने वाला संगठन मानना सही नहीं है। संघ का लक्ष्य पूरे राष्ट्र का कल्याण है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे घृणा के बजाय सात्विक प्रेम और सद्भाव के आधार पर समाज को एकजुट करने का प्रयास करें।
डॉ. भागवत ने संघ की स्थापना के बाद के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि 1925 में संगठन की शुरुआत के बाद पहले उसकी उपेक्षा हुई, फिर विरोध का सामना करना पड़ा और अब उसकी प्रशंसा भी हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान माहौल में स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्हें पहले से अधिक सतर्कता और समर्पण के साथ काम करना चाहिए।उन्होंने शताब्दी वर्ष के दौरान शुरू किए गए कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखने पर जोर दिया। स्वयंसेवकों को एक सरल लक्ष्य देते हुए उन्होंने कहा कि पहले किसी अनजान व्यक्ति से परिचय बढ़ाएं, फिर उससे मित्रता करें और इसके बाद उसे संघ से जोड़ने का प्रयास करें।
संघ प्रमुख ने पानी का उदाहरण देकर स्वयंसेवकों और संगठन के बीच संबंध को समझाया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन के एक परमाणु से पानी बनता है। इसी तरह स्वयंसेवक मिलकर संघ का निर्माण करते हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन, विचारों और आदर्शों को समझने की सलाह भी दी।
डॉ. भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन और आंदोलन का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ हासिल करना या समाज में वैमनस्य बढ़ाना नहीं होना चाहिए। किसी भी आंदोलन के जरिए समस्या का समाधान निकालने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी गतिविधियां संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर की जानी चाहिए।उन्होंने स्वयंसेवकों को यह भी समझाया कि किसी एक सदस्य की गलती का असर पूरे संगठन की छवि पर पड़ सकता है। इसलिए हर स्वयंसेवक को अपने व्यवहार और कार्यों के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए।
संघ प्रमुख ने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने और शाखाओं का विस्तार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संपर्क बढ़ाने का काम लगातार जारी रहना चाहिए। उनके अनुसार, संघ के तीन प्रमुख आधार शाखा, कुटुंब और अपनत्व हैं। इन तीनों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ से जुड़े आनुषांगिक संगठन स्वतंत्र और स्वावलंबी हैं। जरूरत पड़ने पर संघ उन्हें वैचारिक मार्गदर्शन देता है। कार्यक्रम में क्षेत्र संघ चालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना, प्रांत संघ चालक टोपलाल वर्मा सहित संघ के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बौद्धिक वर्ग से पहले संघ पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। इसमें मुख्य शिक्षक, कार्यवाह, नगर, उपनगर और विभाग स्तर के पदाधिकारियों से शताब्दी वर्ष के दौरान किए गए कार्यों की जानकारी ली गई।बैठक में बताया गया कि बीते एक साल में 2311 नई शाखाएं शुरू हुई हैं, जिससे शाखाओं की कुल संख्या बढ़कर 5500 हो गई है। रायपुर के कार्यकर्ताओं ने पावभाजी बेचने वाले लोगों को जोड़ने के लिए रात में शाखा शुरू करने के प्रयोग की जानकारी दी। वहीं, मस्तूरी मंडल की एक शाखा के 10 स्वयंसेवकों ने अलग-अलग स्थानों पर नई शाखाएं शुरू करने की बात कही।
कार्यक्रम में संघ से जुड़े सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और डॉक्टर भी शामिल हुए। बौद्धिक वर्ग में मीडिया के प्रवेश की अनुमति नहीं थी। कार्यक्रम में भाग लेने वाले पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रवेशिका जारी की गई थी। अंदर जाने से पहले सभी सदस्यों के मोबाइल फोन बाहर जमा करा लिए गए थे।
शुक्रवार, 23 अक्टूबर को संघ की दो सत्रों में बैठकें प्रस्तावित हैं। पहले सत्र में आगामी कार्यक्रमों की योजना, अगले साल की रणनीति और युवाओं को संघ से जोड़ने के प्रयासों पर चर्चा होनी है। इसके साथ ही संघ और भाजपा के खिलाफ बनाए जा रहे नैरेटिव को लेकर भी रणनीति पर विचार किया जाएगा।दूसरे सत्र में संघ पदाधिकारियों के साथ भाजपा संगठन के पदाधिकारी, नेता और मंत्री भी शामिल हो सकते हैं। इन बैठकों में संगठनात्मक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होने की संभावना है।
डॉ. मोहन भागवत गुरुवार को गोंडवाना इंटरसिटी एक्सप्रेस से बिलासपुर पहुंचे थे। रेलवे स्टेशन से कोनी स्थित कार्यक्रम स्थल तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सरस्वती महाविद्यालय परिसर और आसपास के इलाकों में 100 से अधिक जवान तैनात रहे।सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए एडिशनल एसपी पंकज पटेल, एडिशनल एसपी मधुलिका सिंह, डीएसपी स्तर के अधिकारी और आधा दर्जन से अधिक निरीक्षकों की तैनाती की गई थी।