

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Mother assumed dead found alive in Yamunanagar ashram after 12 years
नई दिल्ली: मानव सेवा के क्षेत्र में समर्पित सरस्वतीनगर के म्रगरपुर स्थित आश्रम 'नी आसरे दा आसरा' ने एक बार फिर एक बिछड़े हुए परिवार को मिलाकर इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की है। वर्ष 2014 में अपनों से बिछड़ी एक महिला पूरे 12 वर्ष बाद अपने परिजनों से दोबारा मिल सकी। इतने सालों बाद अपनी मां को जीवित देखकर दोनों बेटे पूरी तरह भावुक हो गए और गले मिलकर अपने आंसू नहीं रोक सके। लंबे समय तक कोई सुराग न मिलने के कारण परिवार ने महिला को मृत मानकर उसकी सारी अंतिम रस्में भी निभा दी थीं, लेकिन अब उसे सकुशल देखकर सबकी आंखों में खुशी के आंसू हैं। परिवार के लोग अब महिला को अपने साथ घर ले गए हैं।
जानकारी के अनुसार, अंबाला के साहा थाना पुलिस को गांव सबगा में यह महिला लावारिस हालत में मिली थी, जिसे चार मई 2026 को 'नी आसरे दा आसरा' आश्रम में छोड़ा गया था। आश्रम में आने के समय महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण अपनी पहचान और घर का पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी। एक महीने तक आश्रम में उसकी निस्वार्थ सेवा, उचित देखभाल और इलाज किया गया।

इलाज के दौरान आश्रम की टीम लगातार महिला की काउंसलिंग करती रही। साथ ही इस मामले की सूचना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट तक पहुंचाई गई, जिसने महिला की ट्रैकिंग शुरू की। जब महिला की हालत में सुधार होने लगा, तो उसकी दोबारा काउंसलिंग की गई। इस बार महिला ने अपना नाम राजो देवी बताया। काफी कोशिशों के बाद उसने उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के अंतर्गत आने वाले गांव शेरकोट का जिक्र किया।
सुराग मिलते ही आश्रम की टीम ने तुरंत शेरकोट के सरपंच से संपर्क साधा, जिसके बाद महिला के परिवार का सही पता ठिकाना मिल गया। इसके बाद टीम ने वीडियो कॉल के जरिए परिजनों से बात की, जिसमें उन्होंने राजो देवी की पहचान की।
महिला के बेटे सोनू कुमार ने बताया कि वर्ष 2014 में उनके पिता रामदास से किसी बात पर कहासुनी (विवाद) होने के बाद मां राजो देवी घर से अचानक निकल गई थीं। बहुत ढूंढने के बाद भी जब उनका कुछ पता नहीं चला, तो परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी और उन्हें मृत मान लिया था। बेटे ने भावुक होकर कहा, “हमने तो उम्मीद खो दी थी, लेकिन आज हमारी मां जीवित हैं और हमारे पास हैं।”