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NEET Exam Pattern Change: A major change in the NEET exam pattern is possible; deliberations are underway to conduct the exam in two phases, similar to the CBT and JEE formats.
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार मेडिकल प्रवेश परीक्षा की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। नीट-यूजी को भविष्य में पेन-एंड-पेपर मोड से हटाकर कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में कराने और जेईई की तर्ज पर इसे एक या दो चरणों में आयोजित करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
नीट परीक्षा के पैटर्न और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि परीक्षा को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स काम कर रही है।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि सरकार नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की रिपोर्ट और सिफारिशों का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही NEET-UG के परीक्षा पैटर्न में बदलाव को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सरकार के सामने सबसे अहम विकल्प नीट-यूजी को पेन-एंड-पेपर मोड से हटाकर कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT में कराने का है। अंदरूनी जानकारी के मुताबिक, सरकार इस विकल्प को मंजूरी देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। इससे प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा से पहले पेपर के अनधिकृत तरीके से बाहर आने की आशंका को कम करने में मदद मिल सकती है।
NEET-UG को JEE की तर्ज पर एक या दो चरणों में कराने का विकल्प भी सरकार के विचाराधीन है। दो चरणों में परीक्षा कराने से अभ्यर्थियों को बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिल सकता है और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी यह तय नहीं किया है कि नीट परीक्षा को एक चरण में ही रखा जाएगा या दो चरणों में आयोजित किया जाएगा।
शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नीट परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। टास्क फोर्स परीक्षा की तकनीकी क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था, निष्पक्षता, उपलब्ध बुनियादी ढांचे और छात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है।
सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें प्रश्नपत्र की सुरक्षा के साथ-साथ अभ्यर्थियों को समान अवसर भी मिल सके।
हालांकि, कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने को लेकर कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि CBT से पेपर लीक की आशंका कम की जा सकती है, लेकिन देश के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में रहने वाले कई छात्रों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा का पर्याप्त अनुभव नहीं है।
यदि बिना पर्याप्त तैयारी के CBT लागू किया गया तो डिजिटल सुविधाओं से वंचित छात्रों के लिए यह परेशानी का कारण बन सकता है। इससे परीक्षा में असमानता बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि सरकार NEET को CBT मोड में बदलने का फैसला करती है तो इसे अचानक लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
इसके लिए देशभर में बड़े स्तर पर मॉक टेस्ट, पायलट प्रोजेक्ट और डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। इससे छात्रों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा के माहौल से परिचित होने का पर्याप्त समय मिलेगा।
हर साल देशभर में करीब 22 से 23 लाख अभ्यर्थी NEET-UG परीक्षा में शामिल होते हैं। इतने बड़े स्तर पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा आयोजित करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
देशभर में पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर लैब, स्थिर इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली की उपलब्धता और तकनीकी सहायता सुनिश्चित करना बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी। बिना पर्याप्त बुनियादी ढांचे के CBT व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल NEET-UG के परीक्षा पैटर्न में बदलाव को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। केंद्र सरकार हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिशों का इंतजार कर रही है।
टास्क फोर्स की रिपोर्ट आने के बाद परीक्षा के मोड, चरणों की संख्या और सुरक्षा व्यवस्था समेत अन्य महत्वपूर्ण बदलावों पर फैसला लिया जाएगा। ऐसे में आने वाले समय में NEET-UG की परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।