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National Highways Turn Deadly for Pedestrians; Over 1.82 Lakh Deaths Between 2019 and 2024
नई दिल्ली। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी वर्ष 2024 की सड़क दुर्घटना रिपोर्ट ने देश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पैदल यात्रियों के लिए सबसे अधिक खतरनाक साबित हो रहे हैं। वर्ष 2019 से 2024 के बीच सड़क हादसों में 1.82 लाख से अधिक पैदल यात्रियों की मौत हुई, जिनमें से 57,690 मौतें राष्ट्रीय राजमार्गों पर दर्ज की गईं। यह कुल पैदल यात्री मौतों का 31.58 प्रतिशत है, यानी हर तीसरा पैदल यात्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर अपनी जान गंवा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में देशभर में 4,80,583 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 1,72,890 लोगों की मौत और 4,62,825 लोग घायल हुए थे। वहीं, 2024 में सड़क हादसों की संख्या बढ़कर 4,87,707 हो गई। इन दुर्घटनाओं में 1,77,175 लोगों की जान गई, जबकि 4,71,441 लोग घायल हुए। लगातार बढ़ते आंकड़े सड़क सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच प्रतिवर्ष औसतन 30,500 से अधिक पैदल यात्रियों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई। छह वर्षों में कुल 1,82,678 पैदल यात्रियों ने अपनी जान गंवाई, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुई मौतों की हिस्सेदारी 31.58 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतें दोपहिया वाहन चालकों और सवारों की हुई हैं। वर्ष 2024 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुई कुल सड़क दुर्घटनाओं में 43 प्रतिशत हादसे दोपहिया वाहनों से जुड़े थे, जबकि कुल मौतों में इनकी हिस्सेदारी 45.11 प्रतिशत रही।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ, पैदल पार पथ (क्रॉसिंग) और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की मांग करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट भी पैदल यात्रियों के सुरक्षित आवागमन और फुटपाथ के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कर चुका है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहे हैं।