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'Solver gang' exposed in Re-NEET; medical students in Bihar took the exam for a fee of ₹40 lakh; 24 people arrested.
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 का री-एग्जाम रविवार को देशभर में आयोजित किया गया, लेकिन बिहार के लखीसराय से एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश होने के बाद परीक्षा की पारदर्शिता पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने गैंग के सरगना समेत कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें PMCH, गया मेडिकल कॉलेज, AIIMS रायबरेली और BHU के मेडिकल छात्र तथा बायोमेट्रिक जांच करने वाली कंपनी के 14 कर्मचारी शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के लिए मेडिकल छात्रों से 30 से 40 लाख रुपये तक का सौदा किया गया था। पुलिस ने राजकीय उच्च विद्यालय हसनपुर, KRK हायर सेकेंडरी स्कूल और केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से मोबाइल फोन और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार सॉल्वर गैंग के सरगना अर्पित राज का नाम इससे पहले भी NEET पेपर लीक मामले में सामने आ चुका है। वर्ष 2024 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उससे कई बार पूछताछ की थी। अब री-एग्जाम में फिर उसका नाम सामने आने से जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
री-एग्जाम के दौरान सॉल्वर गैंग के सक्रिय होने की सूचना पर पुलिस और प्रशासन ने नौ संदिग्ध 'मुन्ना भाई' को भी हिरासत में लिया। इनमें KRK विद्यालय परीक्षा केंद्र से एक, केंद्रीय विद्यालय से सात और हसनपुर विद्यालय से एक युवक शामिल है। सभी आरोपी लखीसराय के निवासी बताए जा रहे हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि हाजीपुर निवासी और PMCH का मेडिकल छात्र मयंक बायोमेट्रिक जांच करने वाली कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत से स्वयं कर्मचारी बनकर हसनपुर परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया था। पुलिस ने उसे मौके पर गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ के बाद कंपनी के अन्य कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई और पूरे सॉल्वर गैंग का खुलासा हो सका।
मेडिकल छात्रों को सॉल्वर बनने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने परीक्षा के दौरान सभी मेडिकल कॉलेजों में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक विभागवार सेमिनार और क्विज आयोजित किए थे तथा उपस्थिति अनिवार्य की गई थी। इसके बावजूद PMCH के थर्ड ईयर छात्र की गिरफ्तारी ने विभाग की निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देशभर के लगभग 5,400 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित री-NEET के बाद छात्रों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएं दीं। विशेषज्ञों के अनुसार इस बार प्रश्नपत्र में रटने की बजाय कॉन्सेप्ट आधारित सवालों पर अधिक जोर दिया गया।
फिजिक्स का पेपर सबसे कठिन और लंबा माना गया, जिससे अभ्यर्थियों के औसत स्कोर में 10 से 20 अंकों तक की कमी आ सकती है। वहीं केमिस्ट्री का स्तर सामान्य रहा और इनऑर्गेनिक के अधिकांश प्रश्न सीधे NCERT पर आधारित थे। बायोलॉजी का पेपर अपेक्षाकृत आसान बताया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिजिक्स के कठिन पेपर का असर अंतिम कट-ऑफ पर भी दिखाई दे सकता है। अनुमान है कि कुल कट-ऑफ में 10 से 15 अंकों तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे कई अभ्यर्थियों को राहत मिलने की संभावना है।