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Neemuch: Anganwadi worker Kanchan Bai Meghwal, who saved the lives of 20 children in a bee attack, martyred
Anganwadi worker sacrifice: नीमच जिले के रानपुर गांव में इंसानियत और ममता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। गांव के आंगनवाड़ी केंद्र पर अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। उस वक्त केंद्र में छोटे-छोटे मासूम बच्चे मौजूद थे। बच्चों पर खतरा मंडराता देख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल बिना अपनी जान की परवाह किए उनकी रक्षा के लिए आगे बढ़ गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मधुमक्खियों के हमले से बच्चे घबरा गए और इधर-उधर भागने लगे। कंचन बाई ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए बच्चों को एक-एक कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उन्होंने करीब 20 बच्चों की जान बचाई, लेकिन इसी दौरान मधुमक्खियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और गंभीर रूप से डंक मार दिए।
हमले के बाद कंचन बाई की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। ग्रामीणों की मदद से उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कंचन बाई की शहादत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन बेसुध हैं और गांव में भय व दहशत का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि कंचन बाई बेहद मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ थीं। बच्चों के प्रति उनका स्नेह किसी मां से कम नहीं था। गांव वालों का कहना है कि अगर कंचन बाई समय पर साहस न दिखातीं, तो यह हादसा और भी भयावह हो सकता था।
घटना की सूचना मिलने पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है। वहीं, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने कंचन बाई मेघवाल को “सच्ची नायिका” बताते हुए उन्हें सम्मान देने और उनके परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
कंचन बाई की कुर्बानी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्ची इंसानियत और ममता आज भी जिंदा है—भले ही उसकी कीमत किसी को अपनी जान देकर क्यों न चुकानी पड़े।