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Neglecting passengers' luggage cost IndiGo dearly... Commission delivers a stern verdict after three bags went missing... Find out how much relief the passenger received.
रायपुर। समता कॉलोनी निवासी आशुतोष जाखोदिया को अपने तीन बैग एयरलाइन के भरोसे छोड़ना भारी पड़ गया। करीब 11 साल पुराने इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने इंडिगो एयरलाइंस को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना है। आयोग ने एयरलाइन को कुल 1.82 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा सामान की क्षतिपूर्ति पर 29 अप्रैल 2016 से भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मामला 5 दिसंबर 2015 का है। आशुतोष अपनी शादी के बाद परिवार के साथ दिल्ली से रायपुर लौट रहे थे। दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो कर्मचारियों ने सप्ताहांत की भीड़ और समय की कमी का हवाला देते हुए उनसे तीनों बैग वहीं छोड़ने को कहा। कर्मचारियों ने भरोसा दिलाया कि सामान अगली फ्लाइट से रायपुर भेज दिया जाएगा।रायपुर पहुंचने के बाद आशुतोष ने लगेज बेल्ट पर काफी देर तक इंतजार किया, लेकिन उनके बैग नहीं मिले। एयरलाइन कर्मचारियों की ओर से पहले बताया गया कि सामान उसी फ्लाइट में लोड हुआ है और जल्द मिल जाएगा। बाद में कभी अगली फ्लाइट से बैग आने की बात कही गई। आखिरकार 18 दिसंबर 2015 को एयरलाइन ने तीनों बैग के गुम होने की बात स्वीकार कर ली।
सुनवाई के दौरान इंडिगो ने कई आधारों पर क्षतिपूर्ति से बचने का प्रयास किया। एयरलाइन का तर्क था कि यात्री समूह में यात्रा कर रहा था, इसलिए शिकायत दर्ज करते समय सभी यात्रियों की मौजूदगी जरूरी थी। कंपनी ने यह भी कहा कि यात्री ने प्रॉपर्टी इरेगुलैरिटी रिपोर्ट यानी पीआईआर दर्ज नहीं कराई और चेक-इन के समय सामान में मौजूद कीमती वस्तुओं की घोषणा भी नहीं की थी।खंडपीठ के अध्यक्ष ढाकेश्वर प्रसाद शर्मा, सदस्य निरूपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि यात्री ने अपनी इच्छा से सामान नहीं छोड़ा था, बल्कि एयरलाइन कर्मचारियों के आग्रह पर तीनों बैग वहीं रखे थे। ऐसे में सामान की सुरक्षा और उसे सुरक्षित रूप से गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एयरलाइन की थी।आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में यात्री पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने की शर्त को आधार बनाकर एयरलाइन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
आशुतोष ने तीनों बैग में रखे सामान की कुल कीमत करीब 3.20 लाख रुपये बताई थी। हालांकि, इस मूल्य के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसलिए आयोग ने प्रत्येक बैग के लिए 50 हजार रुपये की दर से कुल 1.50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की।इसके साथ मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये और वाद व्यय तथा अधिवक्ता शुल्क के रूप में 7 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया। इस तरह कुल राशि 1.82 लाख रुपये होती है।
आयोग ने 20 अगस्त 2026 को आदेश जारी किया। इंडिगो को आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर राशि का भुगतान करना होगा। 1.50 लाख रुपये की सामान क्षतिपूर्ति पर 29 अप्रैल 2016 से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता अनिकेत लहरी और अधिवक्ता अपूर्व गोयल ने पैरवी की। आशुतोष ने वर्ष 2016 में उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब आयोग ने यात्री के पक्ष में फैसला सुनाया है।