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No solution has been found for 25 years! A panchayat that has had to hold by-elections 26 times, yet seven seats remain vacant.
जशपुरनगर। लोकतंत्र में चुनाव प्रतिनिधियों के चयन का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है, लेकिन जशपुर जिले की एक पंचायत ऐसी भी है जहां पिछले ढाई दशक से चुनाव कराना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। कुनकुरी विकासखंड की कन्डोरा ग्राम पंचायत में सोमवार को आयोजित उपचुनाव भी विफल रहा और लगातार 26वीं बार पंच पदों के लिए उम्मीदवार नहीं मिल सके।अब यह मामला 27वें उपचुनाव की ओर बढ़ गया है, जबकि यह सिलसिला वर्ष 2001 से लगातार जारी है।
1408 मतदाता, लेकिन 7 वार्डों में एक भी उम्मीदवार नहीं
कन्डोरा पंचायत में कुल 17 पंच पद हैं, जिनमें से 7 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। सोमवार को इन सात रिक्त पदों के लिए उपचुनाव कराया गया, लेकिन एक भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा। नतीजतन सभी सीटें फिर खाली रह गईं।पंचायत में कुल 1408 मतदाता हैं, लेकिन जिन वार्डों में सीटें आरक्षित हैं वहां संबंधित वर्ग का कोई निवासी ही नहीं है। यही कारण है कि हर बार चुनाव प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।
आरक्षण व्यवस्था बनी चुनावी संकट की वजह
जानकारों के अनुसार कन्डोरा पंचायत जशपुर जिले के उस क्षेत्र में आती है जो पेसा अधिनियम और अनुसूची-5 के दायरे में शामिल है। यहां पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू है। वर्ष 2000 में हुए परिसीमन के बाद पहली बार चुनाव कराए गए थे, लेकिन तब से लेकर आज तक यह समस्या बनी हुई है।आरक्षित वार्डों में पात्र उम्मीदवारों की अनुपलब्धता के कारण बार-बार उपचुनाव कराना पड़ रहा है, जिससे प्रशासनिक संसाधन और समय दोनों खर्च हो रहे हैं।
इन वार्डों में वर्षों से खाली हैं पंच पद
पंच पदों के लिए उम्मीदवार नहीं मिलने वाले वार्डों में शामिल हैं—
वार्ड क्रमांक 1 – करमटोली
वार्ड क्रमांक 4 – जामटोली
वार्ड क्रमांक 10 – महुआटोली-1
वार्ड क्रमांक 11 – महुआटोली-2
वार्ड क्रमांक 12 – महुआटोली चौक
वार्ड क्रमांक 14 – महुआटोली-3
वार्ड क्रमांक 16 – चिकटोली
इन सभी वार्डों में वर्षों से पंच पद रिक्त बने हुए हैं।
प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा मामला
जनपद पंचायत कुनकुरी के सीईओ प्रमोद सिंह ने स्वीकार किया कि पंचायत में 17 में से 7 पंच पदों पर लंबे समय से उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस असामान्य स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और आवश्यक सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिसीमन ही हो सकता है स्थायी समाधान
पूर्व संभागायुक्त महादेव कावरे का मानना है कि इस तरह के मामलों में जिला प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को भेजनी चाहिए। रिपोर्ट में पंचायत की वर्तमान जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और प्रतिनिधित्व से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का उल्लेख किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर समीक्षा के बाद वार्डों और सीटों का पुन: परिसीमन किया जा सकता है, जिससे स्थानीय आबादी के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके और वर्षों से चली आ रही यह समस्या समाप्त हो सके।
लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने अनोखी चुनौती
कन्डोरा पंचायत का मामला प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी एक अनोखी स्थिति बनकर सामने आया है। जहां एक ओर चुनाव कराने के लिए प्रशासन को बार-बार उपचुनाव आयोजित करने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उम्मीदवारों के अभाव में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व अधूरा रह जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि शासन इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान किस तरह निकालता है।