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Anti-Naxal Operation: Notorious Naxal commander Papa Rao will formally surrender before Deputy CM Sharma today.
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियानों के बीच एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कुख्यात नक्सली कमांडर पापा राव ने मंगलवार को अपने 17 साथियों के साथ बीजापुर जिले के कुटरू थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। आज वे औपचारिक रूप से डिप्टी सीएम विजय शर्मा के सामने सरेंडर करेंगे, जहां पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और जिला प्रशासन की टीम मौजूद रहेगी।
वरिष्ठ नक्सलियों का समूह भी करेगा सरेंडर
पापा राव के साथ DVCM प्रकाश मड़वी, अनिल ताती समेत कुल 18 नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसे सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है, क्योंकि यह समूह लंबे समय से सक्रिय था।
“अब संविधान के तहत काम करूंगा”- पापा राव
सरेंडर के बाद पापा राव ने कहा कि वह पिछले 10 दिनों से हथियार छोड़ने पर विचार कर रहा था। उन्होंने कहा कि अब वह भारत के संविधान के अनुसार काम करेगा और जनता के हित में योगदान देगा। साथ ही, उसने जंगलों में सक्रिय अपने साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
बस्तर डिवीजन का बड़ा कमांडर
पापा राव पिछले दो दशकों से माओवादी संगठन के वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान संभाल रहा था। हिडमा के मारे जाने के बाद वह क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर बन गया था। उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह कई बार सुरक्षा बलों की घेराबंदी से बच निकलने में सफल रहा था।
बस्तर में राहत की लहर
पापा राव के सरेंडर की खबर के बाद बस्तर के आदिवासी इलाकों में राहत और खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का मानना है कि उसके मुख्यधारा में आने से नक्सलवाद की पकड़ कमजोर होगी।
नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। 2025-26 के दौरान अब तक सैकड़ों नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, और पापा राव का सरेंडर इस अभियान का सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
कौन है पापा राव? (बैकग्राउंड)
पापा राव का असली नाम मंगू दादा उर्फ चंद्रन्ना है। वह सुकमा जिले के निमलगुड़ा गांव का रहने वाला है और 1990 के दशक से माओवादी आंदोलन से जुड़ा हुआ था। वह वेस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रमुख कमांडर था और कई बड़े हमलों की योजना बनाने का आरोप उस पर रहा है।