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CG Crime: Online cricket betting racket busted in Raipur, 4 accused arrested, Rs 18.45 lakh cash and several items seized
रायपुर। राजधानी रायपुर में कबीर नगर पुलिस ने महादेव सट्टा सिंडिकेट की तर्ज पर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा खिलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने खंडहर मकान में बैठकर ramco777.com, wood777.com और powerexch.com वेबसाइट के जरिए सट्टा संचालित कर रहे चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
18.45 लाख रुपए कैश सहित कई सामान जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 18 लाख 45 हजार रुपए नगद, कई मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और 25 से अधिक एटीएम व क्रेडिट कार्ड जब्त किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में दीपक सचदेवा, गौरव सचदेवा, ऋषभ रंगलानी और ओम खेमानी शामिल हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बुधवार शाम मुखबिर से सूचना मिली थी कि तिरंगा चौक फेस-02 कबीर नगर के पास स्थित एक खंडहर में कुछ युवक ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर मौके से दीपक सचदेवा, ऋषभ रंगलानी और गौरव सचदेवा को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान तीनों के पास से लाखों रुपए नगद, मोबाइल और बैंक दस्तावेज बरामद किए गए।
चौथे आरोपी को हीरापुर से किया गिरफ्तार
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने साथी ओम खेमानी का नाम बताया, जिसके बाद पुलिस ने छठ तालाब हीरापुर इलाके से उसे भी गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 3.11 लाख रुपए नगद, तीन मोबाइल फोन और बड़ी संख्या में एटीएम-क्रेडिट कार्ड बरामद किए गए।
मास्टर आईडी के जरिए देते थे सट्टे की सुविधा
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मास्टर आईडी के माध्यम से लोगों को ऑनलाइन सट्टे की आईडी उपलब्ध कराते थे और क्रिकेट मैचों पर दांव लगवाते थे। सट्टे की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता था।
कई धाराओं में मामला दर्ज, नेटवर्क की जांच जारी
चारों आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 112(2) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है और संबंधित बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।
आईडी तैयार करने वालों की तलाश तेज
पुलिस ने बताया कि सिंडिकेट की मास्टर आईडी संचालित करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आईडी तैयार कर उपलब्ध कराने वाले अन्य लोगों की तलाश जारी है। विवेचना अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।