

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Parliamentary committee tough on NEET paper leak and CBSE evaluation controversy, demands response from NTA
नई दिल्ली। NEET पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) विवाद की जांच कर रही संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और CBSE से कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मांगे हैं। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने दोनों संस्थाओं को तलब कर विस्तृत लिखित जानकारी देने को कहा है।
समिति ने NTA से पूछा है कि उसकी नजर में ‘पेपर लीक’ की परिभाषा क्या है। साथ ही 2018 से अब तक आयोजित सभी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। यह सवाल इसलिए उठाया गया क्योंकि हाल ही में NTA अधिकारियों ने दावा किया था कि उनके सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि केवल एक ‘गेस पेपर’ प्रसारित हुआ था।
समिति ने NTA के आंतरिक ढांचे, कर्मचारियों की संख्या और 2022 के बाद की गई नियुक्तियों का पूरा ब्योरा भी मांगा है। एजेंसी की कार्यप्रणाली और परीक्षा संचालन व्यवस्था को लेकर भी सवाल पूछे गए हैं।
CBSE से पूछा गया है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का ठेका ‘कोएम्प्ट’ कंपनी को देने से पहले उसकी पृष्ठभूमि की जांच की गई थी या नहीं। समिति ने यह भी जानना चाहा कि क्या बोर्ड को इस बात की जानकारी थी कि कंपनी के निदेशक पहले ‘ग्लोबारेना टेक्नोलॉजीज’ से जुड़े रहे हैं, जिसका नाम 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम विवाद में सामने आया था।
समिति ने यह भी पूछा है कि OSM की तीसरी निविदा में खराब रिकॉर्ड वाले बोलीदाताओं को अयोग्य घोषित करने वाले प्रावधान क्यों हटाए गए। साथ ही 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग के लिए आधुनिक रोबोटिक स्कैनर के बजाय सामान्य स्कैनर उपयोग करने की अनुमति क्यों दी गई।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मामले को लेकर कहा कि छात्र सार्थक ने CBSE और संबंधित कंपनी के बीच कथित मिलीभगत को उजागर करने का साहस दिखाया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सवाल पूछने और व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करने का पूरा अधिकार है।
अब सभी की नजर NTA और CBSE के जवाबों पर टिकी है। माना जा रहा है कि समिति की जांच से परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।