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Payments bank license revoked, founder also resigns... Paytm overcomes crisis to rank among the top 3 fintech companies
New Delhi। नवंबर 2017 में पेटीएम वॉलेट के करीब 28 करोड़ खाते थे। उस दौर में देश के हर पांच लोगों में से एक के पास पेटीएम खाता होने का दावा किया जाता था। फरवरी 2017 में कंपनी के सीईओ और संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने कहा था कि देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के पास 20.2 करोड़ खाते हैं, जबकि पेटीएम के पास 19 करोड़ खाते हो चुके हैं। यानी खातों की संख्या के मामले में एक स्टार्टअप देश के सबसे बड़े बैंक को टक्कर दे रहा था।चाय की दुकानों से लेकर सब्जी के ठेलों तक पेटीएम से भुगतान की आवाज आम हो गई थी। लेकिन कुछ ही साल बाद कंपनी को बड़े नियामकीय संकट का सामना करना पड़ा।
31 जनवरी 2024 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को 29 फरवरी के बाद नए डिपॉजिट स्वीकार करने, वॉलेट में पैसे डालने और फास्टैग रिचार्ज जैसी सेवाएं देने से रोक दिया था। बाद में इस समय-सीमा को बढ़ाकर 15 मार्च 2024 कर दिया गया।यह कार्रवाई कंपनी के लिए बड़ा झटका थी, क्योंकि पेटीएम के कारोबार का एक अहम हिस्सा उसके पेमेंट्स बैंक से जुड़ा था। खबर के बाद महज दो कारोबारी दिनों में कंपनी के शेयर करीब 36 प्रतिशत टूट गए और बाजार पूंजीकरण से लगभग 18 हजार करोड़ रुपये कम हो गए।8 मई 2024 को शेयर 310 रुपये के अपने निचले स्तर पर पहुंच गया। यह 2,150 रुपये के आईपीओ मूल्य से करीब 85 प्रतिशत कम था। हालांकि, कंपनी ने दूसरे बैंकों के साथ साझेदारी कर भुगतान सेवाओं को जारी रखा और कारोबार को पूरी तरह ठप होने से बचा लिया।
पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस का बाजार मूल्य करीब 1.04 लाख करोड़ रुपये बताया गया है। कंपनी ने सऊदी अरब, सिंगापुर, इंडोनेशिया और लक्जमबर्ग में सहायक कंपनियां बनाई हैं। कनाडा में वर्ष 2014 से उसका रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेंटर पेटीएम लैब्स काम कर रहा है।ब्राजील के स्टार्टअप डिनी में कंपनी की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात की इकाई में एमार के संस्थापक मोहम्मद अल अब्बार से जुड़ी कंपनी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होने का उल्लेख है।
कंपनी के प्रमुख कारोबारी आंकड़े: 8.5 करोड़: हर महीने लेन-देन करने वाले यूजर। 7.1 लाख करोड़ रुपये: जुलाई-सितंबर तिमाही में व्यापारियों को किया गया भुगतान। 1.64 करोड़: साउंडबॉक्स इस्तेमाल करने वाले दुकानदार। 13,617 करोड़ रुपये: कंपनी के पास उपलब्ध नकदी।
केवाईसी में गड़बड़ियां: आरबीआई के 2018 के ऑडिट में पेटीएम पेमेंट्स बैंक के कई खातों में एक ही पैन नंबर से 100 से अधिक ग्राहक जुड़े होने की बात सामने आई थी। इससे मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका पैदा हुई। इसके बाद नए ग्राहक जोड़ने पर रोक लगी। वर्ष 2023 में बैंक पर 5.39 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
चीनी निवेश को लेकर सवाल: आईपीओ से पहले चीन के एंट ग्रुप के पास पेटीएम की 34.7 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इस निवेश को लेकर नियामकीय स्तर पर सवाल उठे। चीनी निवेश से जुड़ी पहचान के कारण निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित हुआ।
महंगा आईपीओ: पेटीएम वर्ष 2021 में करीब 1.39 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई। लेकिन लिस्टिंग के पहले ही दिन शेयर करीब 27 प्रतिशत गिर गया। इससे निवेशकों की संपत्ति में लगभग 38 हजार करोड़ रुपये की कमी आई।
फाउंडर की भूमिका पर सवाल: आईपीओ दस्तावेजों में विजय शेखर शर्मा को नॉन-प्रमोटर बताया गया था, जबकि वर्ष 2021 के रिटर्न में उन्हें प्रमोटर के तौर पर दिखाए जाने का दावा किया गया। इस अंतर को लेकर भी सवाल उठे।
अलीगढ़ में एक शिक्षक के घर जन्मे विजय शेखर शर्मा ने वर्ष 2000 में आठ लाख रुपये का कर्ज लेकर वन97 कम्युनिकेशंस की नींव रखी। शुरुआत में कंपनी मोबाइल पर कंटेंट और वैल्यू एडेड सर्विस उपलब्ध कराती थी।अगस्त 2010 में नोएडा से करीब 20 लाख डॉलर के शुरुआती निवेश के साथ पेटीएम की शुरुआत हुई। शुरुआती दौर में यह मोबाइल और डीटीएच रिचार्ज का प्लेटफॉर्म था।
कैसे पड़ा पेटीएम नाम: Paytm का पूरा नाम Pay Through Mobile है। इसका अर्थ है मोबाइल के जरिए भुगतान। कंपनी का शुरुआती लक्ष्य भी मोबाइल को भुगतान का आसान माध्यम बनाना था।
दूसरे बैंकों के साथ साझेदारी: आरबीआई की तय समय-सीमा 15 मार्च 2024 से पहले पेटीएम को थर्ड पार्टी यूपीआई ऐप के तौर पर मंजूरी मिल गई। इसके बाद एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और यस बैंक उसके नए बैंकिंग साझेदार बने। इससे भुगतान सेवाएं जारी रखने में मदद मिली।
एंट ग्रुप से दूरी: वर्ष 2023 से 2025 के बीच चीन के एंट ग्रुप ने पेटीएम में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी। इससे कंपनी के चीनी निवेश से जुड़े पहलू में बदलाव आया। अगस्त 2025 में आरबीआई ने पेटीएम की पेमेंट सर्विस को पेमेंट एग्रीगेटर के तौर पर मंजूरी दी।
खर्च में कटौती: वर्ष 2024 में कंपनी ने मूवी टिकटिंग कारोबार जोमैटो को करीब 2,048 करोड़ रुपये में बेच दिया। इसके साथ ही कर्मचारियों और अन्य परिचालन खर्चों में कटौती की गई।
सेबी के साथ समझौता: अप्रैल 2025 में विजय शेखर शर्मा ने कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन योजना के तहत 2.1 करोड़ शेयर छोड़ दिए। इसके अलावा उन्होंने 1.1 करोड़ रुपये का जुर्माना भी चुकाया।
पेटीएम अब अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े टूल और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। कंपनी के एआई एजेंट कारोबारियों को मार्केटिंग, विज्ञापन तैयार करने और संभावित ग्राहकों तक पहुंचने में मदद करते हैं।इसके अलावा पीआई इंटरप्राइज एआई प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनियों को एआई मॉडल चलाने और अपने काम के लिए एआई एजेंट तैयार करने की सुविधा देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
डिजिटल भुगतान के बाजार में पेटीएम का मुकाबला फोनपे और गूगल पे से है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में यूपीआई लेन-देन में फोनपे की हिस्सेदारी 45.57 प्रतिशत, गूगल पे की 32.22 प्रतिशत और पेटीएम की 8.1 प्रतिशत रही।