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Pehar Policy: 'Pehar' policy implemented, now digital threats will also be considered terrorism
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की पहली व्यापक आतंकवाद-रोधी Pehar Policy लागू कर दी है। इस नीति के तहत अब डिजिटल खतरे भी आतंकवाद की श्रेणी में माने जाएंगे। यानी साइबर हमले, आपराधिक हैकिंग और नई तकनीकों के जरिए होने वाले हमलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि आतंकवाद को किसी धर्म, जाति या समुदाय से नहीं जोड़ा जाएगा। इस नीति का उद्देश्य “जीरो टॉलरेंस” के सिद्धांत पर तेज, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
नीति के 7 स्तंभ: रोकथाम से लेकर जवाबी कार्रवाई तक
Pehar Policy सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला, खुफिया तंत्र को मजबूत किया जाएगा। संयुक्त आईबी टास्क फोर्स और बहु-एजेंसी केंद्र के जरिए सूचनाओं का बेहतर साझा होगा।
दूसरा, आतंकी हमले की स्थिति में स्थानीय पुलिस पहले एक्शन लेगी। इसके बाद एनएसजी और केंद्रीय बल तुरंत सहायता के लिए पहुंचेंगे। राज्यों में विशेष आतंकवाद-रोधी बल भी गठित किए जाएंगे।
तीसरा, सुरक्षा एजेंसियों का आधुनिकीकरण और प्रशिक्षण बढ़ाया जाएगा। चौथा, भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को आतंकवाद-रोधी ढांचे से जोड़ा गया है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सामाजिक भागीदारी
नीति में कट्टरपंथ रोकने, युवाओं को जागरूक करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर भी जोर है। हमले के बाद सामाजिक एकता बनाए रखने के लिए मनोवैज्ञानिक और सामुदायिक सहयोग की भी व्यवस्था होगी।