

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Planting of Chatim and Conocarpus plants will be banned in Chhattisgarh
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब सप्तपर्णी (छातिम) और कोनोकार्पस के नए पौधों की रोपणी पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह घोषणा विधानसभा में आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने की। भाजपा विधायक सुनील सोनी के सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि पहले से लगे पौधों को काटा नहीं जाएगा, लेकिन भविष्य में वन विभाग के समन्वय से नए पौधों की रोपणी पर रोक लगाई जाएगी।
स्वास्थ्य कारण बने प्रतिबंध का आधार
सप्तपर्णी और कोनोकार्पस के फूलों और पत्तियों से निकलने वाली तीखी गंध और परागकण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, साइनसाइटिस और स्किन एलर्जी जैसी समस्याओं में 20-30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसी कारण से राज्य सरकार ने इनके नए रोपण पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
औषधीय महत्व और सावधानी
हालांकि छातिम के औषधीय गुण भी हैं। इसकी छाल (डिटा बार्क) का आयुर्वेद में मलेरिया, दस्त, त्वचा रोग और सांप के काटने के इलाज में उपयोग किया जाता है। मंत्री चौधरी ने कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही किसी भी आगे की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाएगा।
अन्य पहलें
सदन में पर्यावरण मंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य और वन विभाग मिलकर बेशरम झाड़ समेत अन्य पेड़ों का भी अध्ययन करेंगे। नवा रायपुर में 'पीपल फार पीपल' अभियान के तहत पीपल के पौधे लगाए जा रहे हैं, ताकि शहर को हरा-भरा और स्वास्थ्यवर्धक बनाया जा सके।