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Plot to revive LTTE, major revelation in ED investigation, attempt to withdraw ₹42 crore from dead woman's account
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) को दोबारा सक्रिय करने की साजिश रची जा रही थी। जांच एजेंसी ने चेन्नई के कारोबारी के. बास्करण (K. Baskaran) की भूमिका को बेहद अहम बताया है।
ED के मुताबिक, बास्करण की कंपनी के खातों में विदेश से, खासकर डेनमार्क स्थित LTTE नेटवर्क से करीब 1.66 करोड़ रुपये भेजे गए थे। एजेंसी का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल भारत में मौजूद एक निष्क्रिय बैंक खाते से 42.28 करोड़ रुपये निकालने की योजना के लिए किया जाना था।
डेनमार्क से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क
चार्जशीट के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का संचालन डेनमार्क में बैठे LTTE के पुराने कैडर उमाकांतन द्वारा किया जा रहा था। जांच एजेंसी का कहना है कि भारत में मौजूद सहयोगियों के जरिए इस मिशन को अंजाम देने की तैयारी की गई थी।
ED के मुताबिक, श्रीलंकाई नागरिक लेचुमनन मैरी फ्रांसिस्का (Letchumanan Mary Franciska) को विशेष मिशन के तहत भारत भेजा गया था। उसका मुख्य काम मुंबई स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में दिवंगत हमीदा ए. लल्लजी के नाम पर मौजूद डॉर्मेंट अकाउंट से रकम निकालना था।
फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और नकली पहचान पत्र का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि इस ऑपरेशन के लिए कथित तौर पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई, नकली दस्तावेज बनवाए गए और भारतीय पहचान पत्र हासिल किए गए।
ED के अनुसार, फ्रांसिस्का ने भारत में आधार कार्ड, PAN कार्ड और वोटर ID तक बनवा लिए थे, जबकि उसका वीजा दिसंबर 2020 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद वह नेटवर्क के अन्य सदस्यों के साथ सक्रिय रही और बैंक खाते तक पहुंच बनाने की कोशिश करती रही।
25 लाख रुपये नकद निकासी और कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए करीब 25 लाख रुपये नकद निकाले गए। इसके अलावा कई अन्य ट्रांजैक्शन अलग-अलग लोगों और श्रीलंकाई नागरिकों को किए गए।
ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि नेटवर्क ने एक आरोपी को कारोबारी इस्कंदर लल्लजी बनाकर मुंबई भेजने की योजना बनाई थी। इसके लिए आरोपी ई. मोहन को हिंदी बोलने की विशेष ट्रेनिंग भी दी गई थी।
आरोपियों को भारी रकम का लालच
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन में शामिल लोगों को मोटी रकम का लालच दिया गया था। एक आरोपी को 42 करोड़ रुपये निकालने के बाद 10 प्रतिशत हिस्सा देने का वादा किया गया था, जबकि ई. मोहन को सफल ऑपरेशन के बदले एक लाख रुपये मिलने थे।
इस मामले में रिटायर्ड मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस एन. कन्नादासन का नाम भी सामने आया है। फिलहाल ED पूरे नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और भारत में मौजूद सहयोगियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।