

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार
.jpg&w=3840&q=75)
The government has issued new standards to clear the way for adding 30 percent ethanol to petrol.
नई दिल्ली। देश में निर्धारित समय से पहले 20 प्रतिशत एथनाल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) के लक्ष्य को हासिल करने के बाद अब केंद्र सरकार उच्च स्तर के एथनाल मिश्रण की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकारी एजेंसी भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) ने ई-22, ई-25, ई-27 और ई-30 ईंधन के लिए नए मानक जारी कर दिए हैं। इन मानकों में 22 से 30 प्रतिशत तक एथनाल मिश्रित पेट्रोल की तकनीकी विशिष्टताएं, सैंपलिंग और टेस्टिंग प्रक्रिया तय की गई है।
पेट्रोल पंपों पर स्पष्ट लेबलिंग होगी
बीआइएस के नए नियमों के तहत पेट्रोल पंपों पर ईंधन को स्पष्ट रूप से “ई-22 पेट्रोल”, “ई-25 पेट्रोल” और “ई-30 पेट्रोल” जैसे नामों से प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को ईंधन की मिश्रण मात्रा की सही जानकारी मिल सके।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि एथनाल मिश्रित ईंधन का विस्तार भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में एथनाल मिश्रण बढ़ाने से विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और आयात बिल में भी कमी आएगी।
वैश्विक संकट के बीच बढ़ी रणनीतिक जरूरत
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। पिछले वित्त वर्ष में भारत का कच्चे तेल का आयात बिल करीब 123 अरब डॉलर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार तेल कीमतों में बढ़ोतरी से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ता है और महंगाई में भी इजाफा होता है। ऐसे में एथनाल मिश्रित ईंधन सरकार के लिए रणनीतिक विकल्प बनकर उभर रहा है।
अभी अनिवार्य नहीं है ई-20
हालांकि सरकार ने अभी तक देशभर में ई-20 ईंधन की बिक्री को अनिवार्य नहीं किया है, लेकिन इसकी उपलब्धता लगातार बढ़ाई जा रही है। आने वाले वर्षों में उच्च मिश्रण वाले ईंधनों को भी चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जा सकता है।
ब्राजील मॉडल अपनाने की सलाह
कृषि और ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को ब्राजील की तर्ज पर एथनाल मिश्रित पेट्रोल को सामान्य पेट्रोल से सस्ता बनाना चाहिए। ब्राजील में मिश्रित ईंधन सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत तक सस्ता मिलता है और ऐसे वाहनों को टैक्स में भी छूट दी जाती है।
किसानों और पर्यावरण को होगा लाभ
विशेषज्ञ गुलाटी के अनुसार एथनाल मिश्रित ईंधन केवल विदेशी मुद्रा की बचत ही नहीं करता, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और नए उद्योगों के विकास में भी मददगार साबित हो सकता है। गन्ना और मक्का जैसी फसलों से बनने वाला एथनाल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकता है।