

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Supreme Court takes strict action against liquor being sold in tetra packs and sachets, issues notice to Centre and states over misleading packaging
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने टेट्रा पैक और सैशे जैसी पैकेजिंग में शराब की बिक्री को गंभीर चिंता का विषय मानते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि इस तरह की पैकेजिंग आम जूस या पेय पदार्थों जैसी दिखती है, जिससे उपभोक्ताओं विशेषकर बच्चों और युवाओं में भ्रम पैदा हो सकता है।
एनजीओ की याचिका पर सुनवाई को मंजूरी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने बुधवार को एनजीओ कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। अदालत ने केंद्र सरकार के साथ-साथ सभी राज्यों के आबकारी विभागों के आयुक्तों से जवाब मांगा है।
बच्चों और युवाओं को आकर्षित कर रही पैकेजिंग
संस्था की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विपिन नायर ने अदालत को बताया कि कई शराब उत्पाद फलों की तस्वीरों और आकर्षक डिजाइन वाले पैकेटों में बेचे जा रहे हैं, जो सामान्य जूस उत्पादों जैसे दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि “चिली मैंगो वोदका” और “ग्रीन एप्पल” जैसे फ्लेवर वाले उत्पाद बच्चों और युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं।
स्वास्थ्य चेतावनी की कमी पर भी सवाल
याचिका में यह भी कहा गया कि इन उत्पादों पर तंबाकू उत्पादों की तरह स्पष्ट स्वास्थ्य चेतावनी नहीं दी जाती। इससे लोगों को शराब के दुष्प्रभावों की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती।
सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ सकता है सेवन
वकील ने दलील दी कि टेट्रा पैक और सैशे जैसी छोटी और आसानी से छुपाई जा सकने वाली पैकेजिंग सार्वजनिक स्थानों, वाहनों, पार्कों और शैक्षणिक संस्थानों में शराब सेवन को बढ़ावा दे सकती है। साथ ही इससे कम उम्र के लोगों तक शराब की पहुंच भी आसान हो जाती है।
“बहुत भ्रामक है ऐसी पैकेजिंग”
सुनवाई के दौरान जब अदालत को शराब उत्पादों की तस्वीरें दिखाई गईं, तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी पैकेजिंग “बहुत भ्रामक” है।
राज्यों की अलग-अलग नीतियों पर चिंता
याचिका में कहा गया है कि हर राज्य की बोतलिंग और पैकेजिंग को लेकर अलग नीति होने के कारण इस मुद्दे पर एक समान दिशा-निर्देश जरूरी हैं। संस्था ने अदालत से मांग की है कि जनस्वास्थ्य के हित में ऐसी अस्पष्ट और आकर्षक पैकेजिंग में शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाए।