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Political turmoil: A do-or-die battle for a Rajya Sabha seat pits outsiders and insiders.
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अप्रैल में दो सीटें खाली हो रही हैं। KTS Tulsi और Phoolo Devi Netam का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। मौजूदा विधानसभा गणित के आधार पर भाजपा और कांग्रेस के हिस्से एक-एक सीट जाना लगभग तय माना जा रहा है।
कांग्रेस में बाहरी बनाम स्थानीय की बहस
कांग्रेस खेमे में Abhishek Manu Singhvi के नाम की चर्चा ने बाहरी बनाम स्थानीय की बहस को फिर जिंदा कर दिया है। केटीएस तुलसी के बाद एक और बाहरी चेहरे को मौका देने की संभावना से प्रदेश इकाई का एक वर्ग नाराज बताया जा रहा है। हालांकि, सिंघवी के पक्ष में दिल्ली नेतृत्व की पैरवी और शीर्ष नेताओं के कानूनी मामलों में उनकी भूमिका को बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। फिर भी, स्थानीय कार्यकर्ता “माटी का लाल” को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं। यही मुद्दा कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है।
भाजपा की रणनीति और संभावित समीकरण
वहीं, भाजपा में भी हलचल कम नहीं है। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद सदन में उसकी स्थिति मजबूत हुई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा इस बार किसी स्थानीय और संगठननिष्ठ चेहरे पर दांव लगा सकती है। फिलहाल राज्य की पांच राज्यसभा सीटों में चार कांग्रेस और एक भाजपा के पास है। लेकिन नए विधानसभा समीकरणों के चलते तस्वीर बदलती दिख रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि स्थानीय बनाम बाहरी की सियासी परीक्षा भी बन गया है।