

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Politics heats up over Tara-Hasdeo coal block.
रायपुर। तारा कोल ब्लॉक और हसदेव अरण्य को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सोशल मीडिया बयान पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पाण्डेय ने बघेल पर राजनीतिक पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस हसदेव अरण्य और तारा कोल ब्लॉक को लेकर आज कांग्रेस सवाल उठा रही है, उसकी नींव कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही रखी गई थी।
संतोष पाण्डेय ने तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश के 23 जून 2011 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वन सलाहकार समिति (FAC) ने तारा, परसा ईस्ट और कांते बासन कोल ब्लॉक के प्रस्ताव को पर्यावरणीय आधार पर तीन बार खारिज किया था। इसके बावजूद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री ने FAC की सिफारिशों को दरकिनार करते हुए इन खदानों को स्टेज-1 की मंजूरी दी थी।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि तारा कोल ब्लॉक में पेड़ों की कटाई और खनन के लिए जमीन तैयार करने की प्रक्रिया की शुरुआत कांग्रेस शासन में हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसे हसदेव के जंगलों और छत्तीसगढ़ महतारी की चिंता क्यों नहीं हुई।
‘सत्ता में रहते कुछ और, अब कुछ और रुख’
पाण्डेय ने कहा कि भूपेश बघेल करीब पांच साल तक मुख्यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल में राजस्थान की तत्कालीन कांग्रेस सरकार और उद्योगपतियों के हितों को लेकर हसदेव क्षेत्र में कटाई और खनन की प्रक्रियाएं आगे बढ़ीं। अब सत्ता से बाहर होने के बाद इस मुद्दे पर बयानबाजी करना केवल सस्ती राजनीति है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भूपेश बघेल के आंसुओं से तो घड़ियाल भी शर्मा जाए। पाण्डेय ने बघेल के पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जब हसदेव में खनन का विरोध हो रहा था, तब बघेल ने विरोध करने वालों से अपने घर की बिजली और एसी बंद करने की बात कही थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब बघेल खुद और कांग्रेस के नेता अपने घर-दफ्तर की बिजली और एसी बंद करेंगे?
‘तारा कोल ब्लॉक का आवंटन ई-नीलामी से हुआ’
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक का वर्तमान आवंटन किसी बैकडोर तरीके से नहीं हुआ है। इसका आवंटन भारत सरकार की खुली, प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रिया के तहत हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह नीलामी का चरण है और खनन शुरू करने से पहले सभी आवश्यक वैधानिक एवं पर्यावरणीय मंजूरियां लेना अनिवार्य होगा।
पाण्डेय ने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की वैज्ञानिक रिपोर्ट का भी हवाला दिया और कहा कि उपयुक्त पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों तथा जल प्रबंधन के साथ तारा कोल ब्लॉक को खनन के लिए विचारणीय श्रेणी में रखा गया है।
‘सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध’
भाजपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है। उनके मुताबिक, विकास कार्यों के लिए वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक करीब 1.29 लाख पेड़ काटे गए हैं, जबकि पिछले दो वर्षों में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।
उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार हर साल करीब 3.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। साथ ही भारतीय वन सर्वेक्षण की India State of Forest Report-2023 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के वन एवं वृक्ष आवरण में वृद्धि दर्ज की गई है और राज्य के वन क्षेत्र में करीब 684 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है।
अंत में संतोष पाण्डेय ने भूपेश बघेल से झूठ और पाखंड की राजनीति छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि हसदेव अरण्य में खनन का रास्ता खोलने वाली सरकार कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।