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Politics over UCC heats up in West Bengal.
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने की चर्चा के बीच सियासी माहौल गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य समानता नहीं, बल्कि धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देना है।
बीजेपी की मंशा पर उठाए सवाल
महुआ मोइत्रा ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार समान नागरिक संहिता किस उद्देश्य से लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यदि यह कानून वास्तव में लोगों की भलाई, समान अधिकार और संविधान की भावना को ध्यान में रखकर लाया जाता तो स्थिति अलग होती, लेकिन उन्हें विश्वास है कि इसके पीछे राजनीतिक और धार्मिक ध्रुवीकरण की मंशा है।
‘सबको एक जैसा बनाने की कोशिश’
टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि बीजेपी चाहती है कि देश के सभी लोग एक जैसी जीवनशैली अपनाएं। उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती है कि सभी एक जैसे कपड़े पहनें, एक जैसा भोजन करें और एक जैसी सांस्कृतिक पहचान रखें। महुआ मोइत्रा के अनुसार भारत की विविधता को देखते हुए ऐसा संभव नहीं है और इसका सबसे अधिक असर आदिवासी तथा अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ेगा।
शुभेंदु अधिकारी ने किया था यूसीसी लागू करने का ऐलान
इससे पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि राज्य में भी समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा और पूरी योजना पर विधानसभा में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बनेगी समिति
शुभेंदु अधिकारी के अनुसार समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि गुजरात, उत्तराखंड और असम में अपनाए गए मॉडल के अनुरूप ही पश्चिम बंगाल में भी आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि इस विषय पर सोमवार को विधानसभा में विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।