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Preparations for an attack on Iran following the midterm elections... Major claim in a report regarding a US-Israel plan
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव का खतरा मंडराने लगा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर योजना बनाई है। संभावित लक्ष्यों में ईरान के परमाणु केंद्र, मिसाइल और ड्रोन भंडार तथा कुछ सैन्य ठिकाने शामिल बताए गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, अभी किसी हमले को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संभावित सैन्य अभियान छोटा, लेकिन तीव्र हो सकता है। करीब तीन दिन तक हमले कर ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचाने तथा तेहरान को परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए दबाव में लाने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। यह अभी संभावित योजना है, किसी तय सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित लक्ष्यों में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान, मिसाइल और ड्रोन क्षमता से जुड़े केंद्र तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के कमांड सेंटर शामिल हो सकते हैं।ईरान के पहाड़ों के भीतर स्थित परमाणु केंद्रों को लेकर भी चर्चा है। इनमें 'पिकैक्स माउंटेन' नाम से उल्लेखित ठिकाना संभावित लक्ष्यों में शामिल बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस केंद्र के खिलाफ भारी बम के इस्तेमाल के विकल्प पर भी विचार किया है।हालांकि, इन संभावित लक्ष्यों और हथियारों के इस्तेमाल को लेकर अंतिम फैसला होने की पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की संभावना पर अमेरिकी अधिकारियों के बीच मतभेद बताए गए हैं। एक ओर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले से ईरान को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर विचार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे वैश्विक तेल बाजार और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है।इसी वजह से तेल रिफाइनरी और अन्य ऊर्जा प्रतिष्ठानों को संभावित लक्ष्यों में शामिल करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है, तो तेल की आपूर्ति और कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है।
दूसरी ओर, ईरान ने किसी नए हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने संकेत दिया है कि जवाबी कार्रवाई में सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों, डेटा सेंटरों और समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों जैसे अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की आशंका भी शामिल है।ईरान की इस चेतावनी से क्षेत्रीय संघर्ष के व्यापक होने का खतरा बढ़ सकता है। यदि जवाबी हमले कई देशों तक फैलते हैं, तो इसका असर केवल अमेरिका, इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
इस बीच, इजरायल ने ईरान की सीमा के आसपास अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए बड़ा वायुसेना अभ्यास किया। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के दर्जनों लड़ाकू और हवा में ईंधन भरने वाले विमान लंबी दूरी तक गए। विमानों ने सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्र से होते हुए ईरान की सीमा के करीब उड़ान भरी और फिर वापस लौट आए।इजरायल ने इसे प्रशिक्षण अभ्यास बताया। रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इस अभ्यास का उद्देश्य ईरान को सैन्य संदेश देना भी था। इजरायल ने अमेरिका को इसकी जानकारी पहले ही दे दी थी।कुछ अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि इस तरह की गतिविधि के जवाब में ईरान कोई हमला कर सकता है। ऐसी स्थिति में संघर्ष तेजी से बढ़ सकता था और अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले ट्रंप प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती थी।