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Strong performance by India at the Asian Para Games; Sheetal, Toman, and Suvarna win gold
नई दिल्ली। एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। गुरुवार को भारत ने दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी सफलता में एक और अध्याय जोड़ा। तीरंदाजी में शीतल देवी और तोमन कुमार की जोड़ी ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया। वहीं, सुवर्णा राज ने महिलाओं की F54 डिस्कस थ्रो स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दूसरी ओर, स्वाति चौधरी ने महिलाओं की W1 तीरंदाजी स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
भारत की शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी शीतल देवी और तोमन कुमार ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम के फाइनल में इंडोनेशिया के तीरंदाजों को 151-148 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले भारतीय जोड़ी ने क्वालिफिकेशन राउंड में विश्व रिकॉर्ड बनाकर अपनी मजबूत तैयारी का परिचय दिया था।फाइनल मुकाबले में दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही सटीक निशाने लगाए। पहले एंड के बाद भारत ने 38-37 की बढ़त बनाई। दूसरे एंड में भारतीय जोड़ी ने अपना प्रदर्शन और बेहतर करते हुए स्कोर 77-73 तक पहुंचा दिया। इसके बाद भी भारतीय तीरंदाजों ने अपनी लय बनाए रखी और अंत में तीन अंकों के अंतर से मुकाबला जीत लिया।शीतल देवी का प्रदर्शन खास तौर पर प्रेरणादायक है। जन्म से दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद वह अपने पैरों की सहायता से कंपाउंड बो संभालती हैं। वह कंधे और जबड़े की मदद से धनुष की डोरी खींचकर निशाना लगाती हैं। उनकी सफलता मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत इच्छाशक्ति की मिसाल है।
भारत की सुवर्णा राज ने महिलाओं की F54 डिस्कस थ्रो स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 15.66 मीटर की दूरी तय की और प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया।ग्रेटर नोएडा की रहने वाली 44 वर्षीय सुवर्णा ने अपने छह प्रयासों में से चार बार डिस्कस को 15 मीटर से अधिक दूरी तक पहुंचाया। उनका पांचवां प्रयास सबसे सफल रहा, जिसमें उन्होंने 15.66 मीटर का थ्रो दर्ज किया।इस स्पर्धा में ईरान की शाहला हदीदी ने 15.45 मीटर के साथ रजत पदक जीता, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन 14.65 मीटर के थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहीं और उन्हें कांस्य पदक मिला।F54 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनके धड़ और निचले अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इस स्पर्धा में खिलाड़ी थ्रोइंग चेयर पर बैठकर डिस्कस फेंकते हैं। बेहतर प्रदर्शन के लिए हाथों की ताकत, ऊपरी शरीर की क्षमता और उपलब्ध शारीरिक नियंत्रण का अहम योगदान होता है।
भारतीय तीरंदाज स्वाति चौधरी ने महिलाओं की व्यक्तिगत W1 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर एक खास उपलब्धि हासिल की। वह एशियन पैरा गेम्स की तीरंदाजी प्रतियोगिता में इस वर्ग में भारत के लिए पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनीं।फाइनल में स्वाति का सामना चीन की सेन मेंगकान से हुआ। भारतीय तीरंदाज ने मुकाबले में शानदार शुरुआत करते हुए 4-2 की बढ़त बना ली थी। हालांकि, चीनी खिलाड़ी ने वापसी की और मुकाबले के अगले चरणों में बेहतर निशाने लगाते हुए 6-4 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।स्वाति मेरठ की गुरुकुल आर्चरी अकादमी में एथेंस ओलंपियन सत्यदेव प्रसाद से प्रशिक्षण लेती हैं। फाइनल में उन्होंने कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन आखिरी दो एंड में चीन की खिलाड़ी ने मुकाबले का रुख बदल दिया। स्वाति को भले ही रजत पदक मिला, लेकिन W1 वर्ग में भारत के लिए पहला पदक जीतना उनकी बड़ी उपलब्धि रही।
एशियन पैरा गेम्स में शीतल देवी, तोमन कुमार, सुवर्णा राज और स्वाति चौधरी के प्रदर्शन ने भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिभा और समर्पण को एक बार फिर सामने रखा है। तीरंदाजी में स्वर्ण और रजत पदक के साथ डिस्कस थ्रो में मिली सफलता भारत के लिए खास रही।इन खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से साबित किया कि मजबूत तैयारी, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। भारतीय दल की ये सफलताएं पैरा खेलों को नई पहचान देने के साथ उभरते खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।