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Preparations underway to hand over operations of Bilaspur Airport to AAI; High Court directs for an early decision.
बिलासपुर। बिलासपुर में हवाई सुविधाओं के विस्तार और एयरपोर्ट के विकास को लेकर हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सोमवार को महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच के समक्ष भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने राज्य सरकार के उस प्रस्ताव पर अपना जवाब पेश किया, जिसमें बिलासपुर एयरपोर्ट के संचालन, रखरखाव और विकास की जिम्मेदारी AAI को सौंपने की बात कही गई है।
AAI की ओर से अधिवक्ता अनुमेह श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव को अमल में लाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
कोर्ट ने AAI को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और मामले में बिना अनावश्यक देरी के निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि AAI को एयरपोर्ट के संचालन और विकास की जिम्मेदारी मिलने से बिलासपुर की हवाई सुविधाओं को बेहतर आधारभूत संरचना मिल सकती है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने एयरपोर्ट में चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पब्लिक एमेनिटी बिल्डिंग के निर्माण में हो रही देरी को मंत्रालय और जिला कलेक्टर ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित नई समय सीमा के अनुसार इस भवन का काम 20 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि बिलासपुर एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल और परिधीय सड़क की ब्लैकटॉपिंग के लिए टेंडर स्वीकृत हो चुके हैं। दोनों कार्यों के लिए वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिए गए हैं। इससे एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और आसपास की आधारभूत सुविधाओं के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव और सुदीप श्रीवास्तव ने बिलासपुर से उड़ानों की संख्या में कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से बिलासपुर-जबलपुर-दिल्ली उड़ान सेवा बंद होने की ओर कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बिलासपुर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार जरूरी है और मौजूदा उड़ानों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि अक्टूबर से लागू होने वाले आगामी विंटर शेड्यूल को लेकर आवश्यक स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। सरकार का प्रयास है कि बिलासपुर से संचालित होने वाली उड़ानों की संख्या बढ़ाई जाए और हवाई कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने सुझाव दिया कि बिलासपुर से संचालित होने वाले सभी संभावित हवाई मार्गों को केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ योजना में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए।
सुनवाई के अंत में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव और सुदीप श्रीवास्तव ने चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मामले की लगातार सुनवाई के कारण एयरपोर्ट से जुड़े कार्यों में तेजी आई है और बिलासपुर की हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा 5 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 29 सितंबर को होगी। अगली सुनवाई अलग डिवीजन बेंच के समक्ष होगी।