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Questions raised over Naya Raipur's 1,077-acre residential project; land deals, along with the tender dispute, come under scrutiny.
रायपुर। नवा रायपुर में प्रस्तावित 1077 एकड़ की विशाल आवासीय परियोजना शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। एक तरफ 897 करोड रुपए की टाउन डेवलपमेंट स्कीम की टेंडर प्रक्रिया न्यायालय तक पहुंच गई है, वहीं दूसरी ओर परियोजना क्षेत्र में पहले से खरीदी गई जमीनों को लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि योजना का सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिल सकता है, जिन्होंने वर्षों पहले यहां बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी थी।
जानकारी के अनुसार परियोजना क्षेत्र की लगभग 400 एकड़ निजी जमीन पहले से कारोबारियों, बिल्डरों और प्रभावशाली लोगों के स्वामित्व में है। बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश जमीन एक से पांच वर्ष पहले अपेक्षाकृत कम कीमत पर खरीदी गई थी। योजना सार्वजनिक होने के बाद इलाके में जमीन की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में इन निवेशकों को विकसित प्लाट मिलने पर बड़ा आर्थिक लाभ होने की संभावना जताई जा रही है।
पूरी 1077 एकड़ योजना में करीब 200 एकड़ राधास्वामी सत्संग की भूमि, लगभग 50 एकड़ तालाब क्षेत्र तथा शासकीय, शैक्षणिक, व्यावसायिक और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीन अलग रखी जाएगी। इसके अलावा निजी भू-स्वामियों को विकसित प्लाट लौटाने के बाद खुले बाजार में बिक्री के लिए करीब 300 एकड़ जमीन ही उपलब्ध रहने का अनुमान है। इससे आम नागरिकों के लिए विकल्प सीमित हो सकते हैं।
इस परियोजना में सरकार सीधे नकद भुगतान करने के बजाय अलग व्यवस्था अपनाने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार डेवलपर सड़क, जलापूर्ति, बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास करेगा। इसके बदले उसे लगभग 200 एकड़ मिक्स्ड यूज भूमि या उसके विकास अधिकार दिए जाएंगे। डेवलपर इसी भूमि के व्यावसायिक उपयोग और बिक्री के माध्यम से अपनी लागत की भरपाई करेगा।
परियोजना से जुड़ी 897 करोड रुपए की टाउन डेवलपमेंट स्कीम के दूसरे चरण की टेंडर प्रक्रिया भी विवाद का विषय बन गई है। पहली निविदा तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव एक साथ खोलने के कारण निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद नई निविदा जारी की गई, लेकिन पहले टेंडर में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी ने इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी है। अब न्यायालय के फैसले का असर पूरी परियोजना की आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
जमीन के बदले विकास अधिकार देने की व्यवस्था, भूमि के मूल्यांकन और संभावित लाभार्थियों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण होगा, ताकि सार्वजनिक हित और विकास के बीच संतुलन बना रहे।