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Rahul Gandhi Speech on Paper Leak Bill Creates Uproar in Lok Sabha
नई दिल्ली। पेपर लीक और अनुचित साधनों पर रोक लगाने से जुड़े संशोधन विधेयक पर बुधवार को लोकसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने करीब 50 मिनट तक भाषण दिया और परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक तथा छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उनके कुछ बयानों पर सत्तापक्ष ने आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में कई बार हंगामा हुआ। भारी विरोध के बीच लोकसभा ने विधेयक को पारित कर दिया।
राहुल के भाषण पर सत्ता पक्ष ने जताई आपत्ति
राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान पेपर लीक मामले को युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि लगातार परीक्षाओं में गड़बड़ी से छात्रों का भरोसा टूट रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में बड़ी खामियां हैं और सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर पा रही है।
उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि देश का भविष्य सड़कों पर उतर आया है। छात्रों का आंदोलन गुस्से या नफरत से नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य के लिए है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्तापक्ष ने कड़ा विरोध जताया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल को कई बार टोका और कहा कि सदन में असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता। बाद में इन शब्दों को कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया गया।
रिजिजू ने राहुल से मांगी माफी
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बिना सबूत गंभीर आरोप नहीं लगाने चाहिए।
रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री पर छात्रों पर गोली चलाने और पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति देने का आरोप लगाया है, जो बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने राहुल से सदन में माफी मांगने की मांग की।
रिजिजू ने कई बार खड़े होकर राहुल को संसदीय नियमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने के लिए ठोस आधार होना चाहिए।
राहुल बोले- अगर सिर्फ बीजेपी को बोलना है तो मैं चुप बैठ जाता हूं
सत्तापक्ष के विरोध पर राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार चाहती है कि देश में सिर्फ बीजेपी के लोग ही बोलें तो वह चुप होकर बैठ जाएंगे।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना जरूरी है।
गृह मंत्री पर लगाए आरोप को लेकर हुआ विवाद
राहुल गांधी ने दावा किया कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्री ने पुलिस कार्रवाई और फायरिंग की अनुमति दी थी। इस बयान पर सत्ता पक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
रिजिजू ने कहा कि गोली चलने जैसे गंभीर आरोप बिना प्रमाण के नहीं लगाए जा सकते। उन्होंने राहुल से पूछा कि उन्हें यह जानकारी किस आधार पर मिली और कहा कि ऐसे आरोप वापस लिए जाने चाहिए।
विपक्षी सांसदों ने इस दौरान नारेबाजी करते हुए कहा कि राहुल गांधी को बोलने दिया जाए।
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार किसके निर्देश पर हुआ।
राहुल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बताया दिखावा
राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में बाहरी प्रभाव बढ़ रहा है और शिक्षा मंत्रालय अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह नहीं निभा रहा है। राहुल ने कहा कि मंत्री का इस्तीफा केवल दिखावा होगा, जब तक व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जाता।
राजनाथ सिंह ने शब्द हटाने की मांग की
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से राहुल गांधी के कुछ शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए असंसदीय शब्दों को रिकॉर्ड में नहीं रखा जाना चाहिए।
हंगामे के बीच लोकसभा से बिल पारित
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच लगातार बहस और नारेबाजी के बावजूद लोकसभा की कार्यवाही आगे बढ़ी। चर्चा के बाद पेपर लीक रोकने से जुड़े विधेयक को सदन ने पारित कर दिया।
संसद के बाहर राहुल का पलटवार
लोकसभा में भाषण के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को सदन में आकर स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उन्होंने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का कोई आदेश दिया था या नहीं।
राहुल ने कहा कि अगर गृह मंत्री ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया है तो उन्हें सदन में आकर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें संसद में अपनी बात रखने का अधिकार है और वह अधिकार मिलना चाहिए।
पेपर लीक बिल पर हुई इस बहस ने एक बार फिर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को सामने ला दिया है। जहां विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य का मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार इसे गंभीर आरोपों के साथ राजनीतिक बयानबाजी करार दे रही है।