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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत संवर्ग से स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन हुए शिक्षकों के क्रमोन्नति वेतनमान को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि पंचायत विभाग में शिक्षाकर्मी के रूप में की गई सेवा अवधि को राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों के लिए जारी क्रमोन्नति नियमों के तहत लाभ देने के लिए नहीं जोड़ा जा सकता।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने बस्तर जिले के 27 सहायक शिक्षकों द्वारा दायर रिट अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है।
क्या था पूरा मामला?
बस्तर जिले के 27 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2008 से 2013 के बीच जनपद पंचायत और जिला पंचायतों के माध्यम से शिक्षाकर्मी वर्ग-3 और वर्ग-2 के पदों पर हुई थी। बाद में राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार 1 जुलाई 2018 को इन शिक्षकों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। संविलियन के बाद इन्हें शिक्षक एलबी संवर्ग में शामिल किया गया।
शिक्षकों का तर्क था कि उनकी पहली नियुक्ति को आधार मानते हुए 10 वर्ष की सेवा पूरी हो चुकी है, इसलिए उन्हें क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिया जाना चाहिए।
इसके लिए उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के 10 मार्च 2017 के परिपत्र और हाईकोर्ट के सोना साहू प्रकरण में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए समान लाभ की मांग की थी।
सिंगल बेंच के फैसले को दी थी चुनौती
क्रमोन्नति वेतनमान की मांग को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 24 नवंबर 2025 को शिक्षकों की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद शिक्षकों ने इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की।
अपील दाखिल करने में 47 दिनों की देरी हुई थी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच में हुई।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की अपील?
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि 1 जुलाई 2018 से पहले याचिकाकर्ता पंचायत विभाग के कर्मचारी थे। उस समय उनकी सेवा शर्तें छत्तीसगढ़ पंचायत शिक्षाकर्मी नियमों के तहत निर्धारित होती थीं।
कोर्ट ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग का 10 मार्च 2017 का क्रमोन्नति परिपत्र राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों के लिए जारी किया गया था। यह नियम पंचायत संवर्ग के शिक्षाकर्मियों पर लागू नहीं होता।
इसलिए संविलियन से पहले की सेवा अवधि को आधार बनाकर क्रमोन्नति वेतनमान का दावा नहीं किया जा सकता।
संविलियन आदेश की शर्तों का भी किया उल्लेख
हाईकोर्ट ने शिक्षकों के संविलियन आदेश की कंडिका 4 और 5 का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक एलबी संवर्ग को मिलने वाले लाभों के लिए सेवा की गणना 1 जुलाई 2018 से की जानी है।
साथ ही संविलियन से पहले की अवधि के लिए किसी प्रकार के एरियर भुगतान का प्रावधान नहीं है।
शिक्षकों ने समानता के आधार पर सोना साहू प्रकरण का हवाला दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि वह मामला अलग परिस्थितियों वाला था।
कोर्ट ने बताया कि सोना साहू मामले में विभाग ने पहले क्रमोन्नति का लाभ देने का आदेश जारी किया था, जिसे बाद में वापस लिया गया था। इसलिए उस फैसले को सभी शिक्षाकर्मियों के मामलों में लागू नहीं किया जा सकता।
27 शिक्षकों को नहीं मिलेगा लाभ
डिवीजन बेंच ने सभी तथ्यों और नियमों पर विचार करने के बाद शिक्षकों की रिट अपील खारिज कर दी। इस फैसले के बाद पंचायत संवर्ग से स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन हुए शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति से 10 साल की सेवा के आधार पर क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ नहीं मिलेगा।
हाईकोर्ट के इस निर्णय का असर प्रदेश के उन हजारों शिक्षक एलबी संवर्ग के कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो पंचायत विभाग में शिक्षाकर्मी के रूप में की गई सेवा को जोड़कर क्रमोन्नति लाभ की मांग कर रहे हैं।