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Relief from High Court for Assistant Professor serving on deputation for seven years; order issued for immediate relieving.
दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में सात वर्ष से अधिक समय से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत सहायक प्रोफेसर डॉ. राजमणि पटेल को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत ने उनकी याचिका मंजूर करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार को उन्हें तत्काल कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रतिनियुक्ति समाप्त किए जाने के बाद विश्वविद्यालय किसी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक रोक नहीं सकता।
शासन ने 14 अगस्त 2026 को डॉ. राजमणि पटेल की प्रतिनियुक्ति समाप्त करते हुए उन्हें मूल विभाग में वापस भेजने का आदेश जारी किया था। इसके साथ ही उनकी नई पदस्थापना शासकीय वीवायटी स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में की गई थी। इसके बावजूद विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया।
डॉ. पटेल ने कार्यमुक्त किए जाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से कई बार अनुरोध किया, लेकिन उन्हें रिलीव नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया।
डॉ. राजमणि पटेल की नियुक्ति रसायन शास्त्र के सहायक प्रोफेसर के रूप में 12 नवंबर 2012 को हुई थी। इसके बाद 5 अक्टूबर 2018 को उन्हें हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में उप रजिस्ट्रार के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई थी। इस तरह वे सात वर्ष से अधिक समय से विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे थे।
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से दलील दी गई कि डॉ. पटेल उप रजिस्ट्रार के साथ-साथ परीक्षा नियंत्रक का प्रभार भी संभाल रहे हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल कार्यमुक्त करने से विश्वविद्यालय की परीक्षाओं और परीक्षा संबंधी कार्यों पर असर पड़ सकता है।
विश्वविद्यालय ने इस संबंध में शासन से परीक्षा नियंत्रक के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का अनुरोध किए जाने की बात भी कोर्ट के सामने रखी।
हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय के इस तर्क को डॉ. पटेल को अनिश्चितकाल तक रोकने का आधार नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा नियंत्रक के पद के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना शासन और विश्वविद्यालय का विषय है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रतिनियुक्ति समाप्त करने का आदेश जारी होने के बाद कर्मचारी को केवल इस आधार पर विश्वविद्यालय में नहीं रोका जा सकता कि उसके पास अतिरिक्त जिम्मेदारी है।
हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार को डॉ. राजमणि पटेल को तत्काल कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया। साथ ही शासन के आदेश के अनुसार उन्हें शासकीय वीवायटी स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में नई पदस्थापना पर ज्वाइन कराने को कहा गया है। अदालत के इस आदेश के बाद डॉ. पटेल की सात वर्ष से अधिक लंबी प्रतिनियुक्ति समाप्त होकर उन्हें उनके मूल विभाग में वापस जाने का रास्ता साफ हो गया है।