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Resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan
देशभर में चर्चित NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक विवाद और लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। अपने इस्तीफे के पीछे उन्होंने देश के छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताया है। अपने त्यागपत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए विस्तृत संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद से ही पूरी जिम्मेदारी ली थी।
उन्होंने लिखा, "पहले ही दिन से मैंने इस पर जिम्मेदारी ली। इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प रहा कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे।" इस्तीफे की मुख्य वजह स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, "जंतर-मंतर पर और देश में जो भ्रम की स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं। देश की एकता बनी रहे। देश के किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे... इन्हीं सब बातों पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र पीएम नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।" अपने संदेश के अंत में उन्होंने लिखा कि वे प्रभु जगन्नाथ जी के आशीर्वाद से भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए खुद को समर्पित करते रहेंगे।

नीट-यूजी परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के मामलों को लेकर पिछले एक महीने से अधिक समय से देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा था। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों की अगुवाई में लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। इसके अलावा, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस मुद्दे को लेकर लंबी भूख हड़ताल की थी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और छात्रों के बीच जश्न का माहौल देखा गया। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक प्रमुख अभिजीत दिपके ने जश्न मनाते हुए अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “ये कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, मैं कहता हूं झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए।” सरकार और प्रशासन का मानना है कि इस कदम से देश के छात्रों में विश्वास बहाल करने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। आगामी संसद सत्र और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच शिक्षा मंत्रालय के नए नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।