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। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद छत्तीसगढ़ में भी पेयजल आपूर्ति की जांच तेज कर दी गई थी। इसी बीच अंबिकापुर के एक ही इलाके में पीलिया के 42 मरीज मिलने से हड़कंप मच गया है। बीमारों में बड़ी संख्या बच्चों की बताई जा रही है।
एक साथ 42 मरीज सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। लोगों को बचाव के उपाय बताए गए और सतर्क रहने की सलाह दी गई। नगर निगम के इंजीनियर भी जल आपूर्ति लाइनों की जांच में जुट गए हैं।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि गंदा पानी पीने से लोग बीमार हुए हैं। शिकायत के बाद पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिनमें से 10 में से 4 सैंपल में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। बताया जा रहा है कि पानी में ई-कोलाई की मात्रा 100 से अधिक पाई गई है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिए गए सैंपलों में दूषित पानी की पुष्टि के बाद नगर निगम की जल विभाग टीम भी लगातार सैंपलिंग कर रही है। यह जांच की जा रही है कि दूषित पानी पूरी सप्लाई में है या केवल विशेष क्षेत्र तक सीमित है।
अंबिकापुर नगर निगम में पहले बांक नदी के पानी को फिल्टर कर शहर में सप्लाई किया जाता था। बाद में अमृत मिशन योजना के तहत कटकालो में नई यूनिट लगाई गई और घुंघुट्टा नदी का पानी भी जोड़ा गया। वर्तमान में शहर को बांक और घुंघुट्टा दोनों नदियों से पानी मिल रहा है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं और मरीजों को अस्पताल भेजा जा रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पीलिया पूरी तरह दूषित पानी से फैला है या अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं। निगम के इंजीनियर सप्लाई लाइन में गड़बड़ी की वजह तलाशने में जुटे हैं।