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Sagar Spurious Liquor Tragedy: Political connection surfaces after 25 deaths; two Sarpanchs and a liquor contractor also named as accused.
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब कांड के बाद अब मामले में कथित राजनीतिक कनेक्शन भी सामने आया है। पुलिस द्वारा दर्ज दो एफआईआर में जहरीली शराब की बिक्री और सप्लाई के आरोप में कुल 30 लोगों को नामजद किया गया है। इनमें दो सरपंच और एक शराब ठेकेदार भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग खुद को सत्ताधारी भाजपा से जुड़ा बताते हैं और अधिकारियों के बीच अपनी पहुंच होने का दावा करते रहे हैं।
पुलिस की एफआईआर में जिन 30 लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें दो सरपंच और शराब ठेकेदार का नाम भी शामिल है। आरोप है कि ये लोग जहरीली शराब के नेटवर्क से जुड़े हुए थे और शराब की बिक्री एवं सप्लाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। सूत्रों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि कुछ आरोपियों को प्रदेश के एक पूर्व मंत्री का संरक्षण प्राप्त था। हालांकि, इन राजनीतिक संबंधों और संरक्षण के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
शनिवार रात सामने आए इस शराब कांड में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को सात और प्रभावित लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है, जिसमें एक महिला भी शामिल है।
वहीं, करीब 200 लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आ रही है। इनमें 10 से अधिक लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक मृतकों और बीमार लोगों की कुल संख्या का आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
घटना के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अस्पतालों में मीडिया कर्मियों को मरीजों के परिजनों से बातचीत करने से रोका जा रहा है। इससे मामले में वास्तविक स्थिति और प्रशासन द्वारा जारी किए जा रहे आंकड़ों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
मृतकों के परिजनों का कहना है कि प्रभावित लोगों ने गांव में ही मिलने वाली 'सागर गोल्ड' देसी शराब का सेवन किया था। शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। उपचार के दौरान कई लोगों की मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि जिस अवैध शराब को इस हादसे की वजह माना जा रहा है, वह सरकारी ठेके पर मिलने वाली शराब की तुलना में काफी सस्ती थी। यही वजह है कि कम आय वाले लोगों के बीच इसकी बिक्री काफी अधिक थी।
जानकारी के मुताबिक, यह शराब करीब 40 रुपये प्रति पव्वा में बेची जा रही थी। घटना के बाद जांच में कथित तौर पर यह बात भी सामने आई कि नकली शराब के पव्वे सरकारी शराब ठेकों से भी बेचे गए थे। इस खुलासे के बाद शराब के अवैध नेटवर्क के साथ-साथ सरकारी तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जहरीली शराब कांड के बाद उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सोमवार को प्रभावित लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद राज्य सरकार ने मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मंजूरी दी है।
देवड़ा ने कहा कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
25 लोगों की मौत और करीब 200 लोगों के बीमार होने के बाद सागर शराब कांड अब केवल अवैध शराब की बिक्री का मामला नहीं रह गया है। दो सरपंचों, शराब ठेकेदार और कथित राजनीतिक संरक्षण के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि जहरीली शराब का नेटवर्क कितना बड़ा था, नकली शराब सरकारी ठेकों तक कैसे पहुंची और इसमें राजनीतिक अथवा प्रशासनिक स्तर पर किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।