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The wait continues even 12 days after the devastation in Nepal... amidst the search for 5,500 people, rescuing lives trapped in tunnels has emerged as the biggest challenge.
नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के करीब 12 दिन गुजरने के बाद भी हजारों परिवार अपनों की तलाश में हैं। अब तक करीब 5,500 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। समय बीतने के साथ इनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगातार कमजोर होती जा रही है। इस प्राकृतिक आपदा में 1,356 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 13,396 लोगों को अलग-अलग स्थानों से सुरक्षित निकाला गया है।
नेपाल में राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं। हालांकि, अभियान के सामने अब सबसे कठिन चुनौती हाइड्रोपावर परियोजनाओं की भूमिगत सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने की है।रायटर की रिपोर्ट के मुताबिक, नौ जिलों में अचानक आई बाढ़ के कारण हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में करीब 121 लोगों के फंसे होने की आशंका है। इन लोगों तक पहुंचना बचाव दलों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, राहत और बचाव प्रयासों में भारतीय दल भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अब तक बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ डीएनए से जुड़ी पहचान प्रक्रिया पर भी काम किया गया है।अब तक 1,200 से अधिक डीएनए नमूनों की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और 292 डीएनए प्रोफाइल तैयार किए गए हैं। इससे लापता लोगों की पहचान और उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
चीन स्थित भारतीय दूतावास ने तिब्बत में लापता भारतीय नागरिकों के परिजनों से डीएनए नमूने उपलब्ध कराने की अपील की है। इसका उद्देश्य आपदा के बाद लापता लोगों की पहचान प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में नेपाल में सोमवार को 13वें दिन का शोक मनाया गया। हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद 13वें दिन को शोक अवधि के समापन से जोड़ा जाता है। इस अवसर पर नेपाल के अलावा विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों में भी शोक कार्यक्रम आयोजित किए गए और राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा।काठमांडू में लोगों ने आपदा में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना भी की।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने राहत अभियान को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की है। सरकार को बड़े ड्रोन, बेली ब्रिज, डीएनए जांच किट, सुरंग बचाव सूट और महामारी से निपटने वाले उपकरणों की जरूरत बताई गई है।
आपदा से प्रभावित करीब 3,500 लोगों को रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के अलग-अलग आश्रय केंद्रों में रखा गया है। इन शिविरों में रह रहे लोगों के लिए भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।