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School operators upset over new requirement for English-medium teachers; demand rule relaxation and a 3-to-5-year grace period from the Board of Secondary Education.
रायपुर। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की मान्यता और संबद्धता के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल की नई गाइडलाइन पर निजी स्कूल संचालकों ने आपत्ति जताई है। नए प्रावधान के अनुसार अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए 12वीं और स्नातकोत्तर की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से होना जरूरी किया गया है। स्कूल संचालकों का कहना है कि इस शर्त को इसी रूप में लागू करने से खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के स्कूलों के सामने अनुभवी शिक्षकों की कमी खड़ी हो सकती है।छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने माशिमं को पत्र भेजकर नियमों में राहत देने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि शिक्षक की योग्यता तय करते समय केवल उसकी पिछली पढ़ाई का माध्यम नहीं, बल्कि अंग्रेजी में पढ़ाने की क्षमता, विषय ज्ञान और अनुभव को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
स्कूल संचालकों का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने अपनी स्कूली या उच्च शिक्षा हिंदी माध्यम से पूरी की है। इसके बावजूद वे अंग्रेजी में धाराप्रवाह तरीके से विषय पढ़ाने में सक्षम हैं और वर्षों से निजी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं।नई शर्त लागू होने पर ऐसे शिक्षकों की पात्रता केवल इसलिए प्रभावित हो सकती है क्योंकि उनकी पिछली शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी नहीं था। संचालकों का तर्क है कि इससे खासकर उन क्षेत्रों में परेशानी ज्यादा होगी, जहां अंग्रेजी माध्यम से पढ़े योग्य शिक्षकों की उपलब्धता पहले से सीमित है।
अशासकीय स्कूल संचालकों ने नियमों को तत्काल लागू करने के बजाय 3 से 5 साल का संक्रमणकाल देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस अवधि में स्कूल नए मानकों के अनुसार शिक्षकों की व्यवस्था कर सकेंगे।संगठन ने पहले से कार्यरत शिक्षकों को नई शर्त से छूट देने का सुझाव भी दिया है। इससे अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं जारी रह सकेंगी और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अचानक असर नहीं पड़ेगा।
संचालकों का कहना है कि किसी शिक्षक की वास्तविक योग्यता का आकलन उसके विषय ज्ञान और पढ़ाने की क्षमता से होना चाहिए। यदि कोई शिक्षक हिंदी माध्यम से पढ़ा है, लेकिन अंग्रेजी में प्रभावी ढंग से विद्यार्थियों को पढ़ा सकता है और संबंधित विषय में उसकी अच्छी पकड़ है, तो उसे केवल माध्यम के आधार पर अयोग्य नहीं माना जाना चाहिए।एसोसिएशन ने मांग की है कि मान्यता प्रक्रिया में अंग्रेजी में अध्यापन क्षमता, विषय दक्षता, परीक्षा आधारित मूल्यांकन और पूर्व अध्यापन अनुभव जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जाए।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि सीबीएसई और आईसीएसई जैसे राष्ट्रीय बोर्डों में भी शिक्षक की योग्यता तय करते समय केवल उसकी पिछली शिक्षा के माध्यम को आधार नहीं बनाया जाता। वहां विषय ज्ञान और अध्यापन क्षमता को महत्व दिया जाता है।उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि योग्य और अनुभवी शिक्षकों को केवल शिक्षा के माध्यम के आधार पर अवसर से वंचित न होना पड़े।