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Signs of a major reshuffle in the Modi Cabinet Several ministers could be replaced before the Monsoon Session
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय कैबिनेट में जल्द ही एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष स्तर से मिल रहे संकेतों के मुताबिक, संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले इस बदलाव को अंजाम दिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, यह फेरबदल जुलाई के महीने में कभी भी हो सकता है, क्योंकि मानसून सत्र आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। फेरबदल की अंतिम तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय की जाएगी।
राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तब और तेज हो गईं जब बीते 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इसके ठीक दो दिन बाद, 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी राष्ट्रपति से मुलाकात हुई, जिससे इन अटकलों को और बल मिला है।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पिछले सप्ताह कुछ केंद्रीय राज्य मंत्रियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया था। इस फेरबदल में 'सरकार से संगठन और संगठन से सरकार' का फॉर्मूला देखने को मिल सकता है:
मंत्रियों को मिलेगी संगठन की जिम्मेदारी: प्रबल संभावना है कि कुछ मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों को सरकार से हटाकर भाजपा में अहम संगठनात्मक भूमिकाएं सौंपी जाएंगी। संगठन में काम कर रहे कुछ प्रमुख पार्टी पदाधिकारियों को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
इस संभावित फेरबदल में कुछ बड़े नामों पर भी गाज गिर सकती है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के प्रश्नपत्र लीक मामले और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में आई अनियमितताओं जैसे गंभीर विवादों के कारण शिक्षा मंत्रालय लगातार विपक्ष और जनता के निशाने पर है। इन विवादों के चलते वर्तमान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक भविष्य और कैबिनेट में उनके स्थान को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कैबिनेट फेरबदल के साथ-साथ शीर्ष नेतृत्व को दो प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों—हरदीप सिंह पुरी और बी. एल. वर्मा के भविष्य पर भी फैसला लेना है। इन दोनों मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल इसी वर्ष नवंबर में समाप्त हो रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा आलाकमान इन्हें दोबारा उच्च सदन भेजने का फैसला करता है या उनकी भूमिकाओं में कोई बड़ा बदलाव किया जाता है।
कुल मिलाकर, आगामी मानसून सत्र से पहले होने वाला यह फेरबदल आगामी राजनीतिक समीकरणों और पार्टी की भविष्य की रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार इसके जरिए न सिर्फ अपनी छवि को नया रूप देना चाहती है, बल्कि संगठन को भी और मजबूत करने की तैयारी में है।