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Strategy to take the achievements of the Modi government over the last 12 years to every household.
छत्तीसगढ़ की राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरकारी निवास पर कैबिनेट मंत्रियों की एक हाई-लेवल मैराथन बैठक आयोजित की गई। बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात करीब 9 बजे शुरू हुई यह बैठक देर रात 2 बजे के बाद तक यानी लगभग 5 घंटे तक चली। इस लंबी बैठक को लेकर सत्ता और संगठन के बीच बढ़ती दूरी, मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और कार्यकर्ताओं की नाराजगी जैसे कई कयास लगाए जाने लगे। हालांकि, बैठक से बाहर निकले मंत्रियों और खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इन अटकलों को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह एक नियमित और समीक्षा बैठक करार दिया।
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि यह कोई आपातकालीन बैठक नहीं थी, बल्कि इसमें केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने और राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी व रिजल्ट ओरिएंटेड बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के सफल 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चलाए जा रहे '12 साल बेमिसाल : विश्वास के, विकास के' अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित की गई थी। साथ ही मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी की गई और उनसे पूछा गया कि वे अपने विभागों तथा प्रभार वाले जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कितना काम कर पा रहे हैं।
मंत्री, सांसद और विधायक संभालेंगे जनसंपर्क अभियान की जिम्मेदारी
बैठक में भाजपा के प्रदेशव्यापी जनसंपर्क अभियान की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई। इसके तहत मंत्री, सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाएंगे। प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक पदाधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं।
अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें 'विकास और संवाद' कार्यक्रम के जरिए विकसित भारत विषयक कार्यक्रम, बुद्धिजीवी सम्मान समारोह, व्याख्यान और केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों के साथ संवाद शामिल रहेगा।
इसी प्रकार कृषि और पर्यावरण से जुड़े आयोजनों के तहत जैविक खेती और प्राकृतिक खाद को बढ़ावा देने, कृषि कार्यशालाओं तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। वहीं जनसेवा कार्यक्रमों के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनकल्याण शिविर लगाए जाएंगे।
योग दिवस पर विशेष कार्यक्रम और प्रदर्शनियां
अभियान के तहत आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पूरे प्रदेश में विशेष और भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही मोदी सरकार के 12 वर्षों के विकास कार्यों को प्रदर्शित करने के लिए जगह-जगह प्रदर्शनियां, सम्मेलन और संवाद कार्यक्रम आयोजित कर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
23 जिलों में चलेगा 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान
बैठक में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में यह योजना प्रदेश के 10 जिलों में संचालित है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 23 जिलों में लागू करने का निर्णय लिया गया है।
अभियान के तहत जिलों को चार संभागों में विभाजित किया गया है—
रायपुर संभाग: रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी और महासमुंद।
बिलासपुर संभाग: बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और सारंगढ़-बिलाईगढ़।
दुर्ग संभाग: दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम और राजनांदगांव।
सरगुजा संभाग: सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज और जशपुर।
इस योजना का उद्देश्य प्रदेश की महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। अभियान में तकनीक का व्यापक उपयोग करते हुए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है, जो मुख्यमंत्री से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक योजनाओं की प्रगति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगा।
बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा समेत मंत्री केदार कश्यप, गुरु खुशवंत साहेब, लक्ष्मी राजवाड़े, दयाल दास बघेल, टंकराम वर्मा, लखनलाल देवांगन और श्याम बिहारी जायसवाल प्रमुख रूप से शामिल हुए। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, “यह कोई असाधारण बैठक नहीं थी, बल्कि हर तीन महीने में आयोजित होने वाली नियमित समीक्षा बैठक थी। मंत्रिमंडल में बदलाव का विषय पूरी तरह मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र का है।”
डिप्टी सीएम अरुण साव ने भी फेरबदल की अटकलों को निराधार बताते हुए कहा कि यह एक रूटीन बैठक थी जिसमें रिकॉर्ड समय तक पीएम रहने वाले नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में आए परिवर्तनों को जन-जन तक पहुंचाने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। मंत्री रामविचार नेताम ने मुस्कुराते हुए कहा कि सभी प्रकार की अटकलें बेबुनियाद हैं और लोगों को अनावश्यक कयास लगाने से बचना चाहिए। दूसरी तरफ, विपक्ष ने इस पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि "भाजपा संगठन और सरकार के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है।" हालांकि, सत्ता पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि यह बैठक पूरी तरह से विकास कार्यों की समीक्षा और आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों को गति देने के लिए थी।
जुलाई में IIM नवा रायपुर में होगा चिंतन शिविर 3.0
बैठक में राज्य सरकार के आगामी चिंतन शिविर 3.0 की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ सरकार जुलाई में नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करने जा रही है। इसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य भाग लेंगे।
सरकार इसे प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने, शासन व्यवस्था को मजबूत करने और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मान रही है। शिविर का मुख्य उद्देश्य मंत्रियों की कार्यशैली को अधिक दक्ष, आधुनिक, जवाबदेह और जनहित केंद्रित बनाना है, ताकि शासन की योजनाओं और नीतियों का लाभ आम लोगों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंच सके।
मंत्रियों को मिलेगा आधुनिक प्रशासन का प्रशिक्षण
चिंतन शिविर में मंत्रियों को प्रशासनिक प्रबंधन, नीति निर्माण, नेतृत्व विकास, सुशासन, तकनीकी नवाचार, जनसेवा और विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन विशेषज्ञ, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और विषय विशेषज्ञ विभिन्न सत्रों के माध्यम से बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने के उपायों पर मार्गदर्शन देंगे।
शिविर में विशेष रूप से योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग, परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति विकसित करने, त्वरित निर्णय प्रक्रिया अपनाने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और बेहतर सेवा वितरण पर जोर रहेगा। साथ ही राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा और प्रशासनिक सुधारों पर भी व्यापक मंथन किया जाएगा।
साय सरकार के अब तक के चिंतन शिविरों का सफर
1. पहला चिंतन शिविर (31 मई - 1 जून 2024): आईआईएम नवा रायपुर में आयोजित इस शिविर में 'विकसित छत्तीसगढ़-2047' के विजन, सुशासन, नीति निर्माण और प्रशासनिक दक्षता पर मंथन हुआ था, जिसे नीति आयोग के विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों ने संबोधित किया था।
2. चिंतन शिविर 2.0 (8-9 जून 2025): इसमें सरकार के डेढ़ वर्ष के कामकाज की समीक्षा, विभागीय समन्वय, नवाचार, वित्तीय प्रबंधन, शिक्षा-स्वास्थ्य और विकसित छत्तीसगढ़ के रोडमैप पर चर्चा हुई थी, जहां मंत्रियों ने विभागवार प्रस्तुतियां दी थीं।
3. अब चिंतन शिविर 3.0 (जुलाई 2026): पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार के कार्यक्रम को और अधिक व्यावहारिक, परिणामोन्मुख और जनहित केंद्रित बनाने की तैयारी है।
सरकार का कहना है कि पिछले दो चिंतन शिविरों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार के कार्यक्रम को अधिक व्यावहारिक, परिणामोन्मुख और जनहित केंद्रित बनाया जा रहा है। इस तरह एक ओर सरकार मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है, वहीं दूसरी ओर शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने के लिए मंत्रियों को आधुनिक प्रशासनिक प्रशिक्षण देने की तैयारी भी कर रही है।