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Students took to the streets over issues concerning roads, education, and facilities... they presented their grievances to the administration in several districts of UP.
Lucknow। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब स्थानीय बुनियादी सुविधाओं और स्कूलों की व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं को सामने ला रहा है। बुधवार को हमीरपुर, महोबा और उन्नाव में विद्यार्थियों ने सड़क, शिक्षकों की कमी, भोजन की गुणवत्ता और स्कूल की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रदर्शन किया। इन घटनाओं ने शिक्षा संस्थानों में व्यवस्थागत खामियों पर प्रशासन का ध्यान खींचा है।
उन्नाव की न्योतनी नगर पंचायत स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय आश्रम पद्धति विद्यालय में करीब 379 विद्यार्थी इंटरमीडिएट तक अध्ययन करते हैं। बुधवार सुबह लगभग 250 छात्र-छात्राएं मोहान चौराहे पर पहुंच गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।विद्यार्थियों ने स्कूल में शिक्षकों की कमी, भोजन की खराब गुणवत्ता और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव की शिकायत की। उनका आरोप था कि विरोध करने पर प्रधानाचार्य और बाबू द्वारा धमकाने तथा मारपीट करने जैसी घटनाएं होती हैं। छात्रों ने यह भी कहा कि बीमार होने पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती और केवल पैरासिटामोल देकर मामला टाल दिया जाता है।प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद करीब पौने तीन घंटे में छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त किया।
महोबा के रैपुराकला गांव में कक्षा छह से 10 तक के विद्यार्थियों ने गांव से शहर तक जाने वाली सड़क की खराब स्थिति को लेकर विरोध किया। सुबह करीब नौ बजे छात्र झांसी-मीरजापुर हाईवे पर पहुंच गए और सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।विद्यार्थियों के अनुसार गांव से शहर तक करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क बेहद खराब है। इसकी वजह से उन्हें स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।बारिश के बीच छात्र करीब तीन घंटे तक प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे और सड़क निर्माण की मांग उठाते रहे।
हमीरपुर के कुरारा क्षेत्र में ग्रामीणों और प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों ने भी खराब सड़क को लेकर आवाज उठाई। करीब चार किलोमीटर लंबे बदहाल मार्ग को ठीक कराने की मांग को लेकर छात्र दोपहर करीब 12 बजे कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए।पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन बच्चे गलियों के रास्ते कलेक्ट्रेट पहुंच गए और वहां धरने पर बैठ गए। छात्रों की मांग थी कि स्कूल तक पहुंचने वाले मार्ग को जल्द दुरुस्त कराया जाए।इससे पहले 11 अगस्त को भी हमीरपुर के बच्चे करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। सड़क की समस्या से जुड़े इस मामले में हाई कोर्ट ने दैनिक जागरण की खबर का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।
हमीरपुर, महोबा और उन्नाव की घटनाओं में मुद्दे अलग-अलग हैं, लेकिन तीनों जगह छात्रों की शिकायतों का केंद्र शिक्षा व्यवस्था और उससे जुड़ी बुनियादी सुविधाएं हैं। कहीं स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है तो कहीं संस्थान के भीतर शिक्षक, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।लगातार हो रहे इन प्रदर्शनों से साफ है कि छात्र अब अपनी समस्याओं को लेकर सीधे प्रशासन के सामने आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में शिकायतों की समय पर जांच और स्थानीय स्तर पर समाधान प्रशासन के लिए अहम चुनौती बन गया है।