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Supreme Court takes strong note of Kolkata ED raid, terms CM's intervention as 'extraordinary' case
नई दिल्ली। ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता में Enforcement Directorate (ED) के छापे के दौरान मौके पर पहुंचने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप करना “असाधारण” और गंभीर मामला है, जो लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा बन सकता है।
“यह केंद्र-राज्य विवाद नहीं, संवैधानिक बाधा का मामला”
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला केंद्र और राज्य के बीच टकराव का नहीं है, बल्कि संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप से जुड़ा है। पीठ ने कहा कि जब कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति जांच में बाधा डालता है, तो इसे सामान्य प्रशासनिक विवाद नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फैसलों की नजीरों को किया खारिज
पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश दलीलों पर असहमति जताते हुए कहा कि पूर्व के न्यायिक फैसलों में ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की गई होगी, जहां कोई मुख्यमंत्री खुद छापे की कार्रवाई के दौरान वहां पहुंच जाए।
राज्य की ओर से दलील यह केंद्र बनाम राज्य का मामला
बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि यह विवाद केंद्र और राज्य के बीच का है और ED को अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने जताई असहमति, कहा-“राज्य का अधिकार कहां?”
इस पर सुनवाई कर रही पीठ, जिसमें जस्टिस प्रशांत कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया शामिल हैं, ने सवाल उठाया कि इसमें राज्य के अधिकारों का कौन सा पहलू प्रभावित हो रहा है। अदालत ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा जांच में दखल देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
संविधान पीठ को सौंपने की मांग
मामले में जटिल कानूनी प्रश्नों का हवाला देते हुए गुरुस्वामी ने इसे पांच जजों की संविधान पीठ को भेजने की मांग भी की।
अगली सुनवाई में केंद्र रखेगा पक्ष
मामले में आज गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। केंद्र और ED की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में अपना पक्ष रख सकते हैं।