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TMC must vacate temporary headquarters; landlord issues two-month ultimatum.
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अंदरूनी कलह से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अब अपने अस्थायी मुख्यालय को लेकर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी जिस भवन का उपयोग पिछले कुछ वर्षों से अस्थायी हेडक्वार्टर के रूप में कर रही थी, उसके मालिक ने दो महीने के भीतर परिसर खाली करने का नोटिस दिया है।
मालिक ने पुलिस से भी मांगी मदद
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भवन के मालिक मोंटू साहा और उनके बेटे ने भवन खाली कराने के लिए पुलिस प्रशासन से भी संपर्क किया है। उनका कहना है कि लीज अवधि समाप्त होने के बावजूद पार्टी ने अब तक परिसर खाली नहीं किया है।
2022 से बना हुआ था पार्टी का अस्थायी मुख्यालय
टोपसिया स्थित ईएम बाईपास रोड पर मौजूद इस भवन को आमतौर पर “तृणमूल भवन” के नाम से जाना जाता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद पार्टी के स्थायी कार्यालय के पुनर्निर्माण के लिए पुराने भवन को तोड़ दिया गया था, जिसके बाद TMC ने 2022 में इस इमारत को किराए पर लेकर अपना अस्थायी मुख्यालय बनाया था।
लीज खत्म होने के बाद भी जारी रहा उपयोग
भवन मालिकों के अनुसार, प्रारंभिक किरायानामा दो वर्षों के लिए था, जिसे बाद में एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया। वर्ष 2025 में यह अवधि समाप्त हो गई थी, लेकिन इसके बाद भी पार्टी ने भवन खाली नहीं किया। परिवार का आरोप है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
चुनावी हार के बाद बढ़ी सुरक्षा की चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, साहा परिवार का कहना है कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों के बाद इलाके में उत्पन्न तनाव ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। मालिक का कहना है कि भवन के बाहर हुई तोड़फोड़ और अशांति के कारण संपत्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
पार्टी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा भवन
पिछले तीन वर्षों में यह भवन TMC की राजनीतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान भी यहीं से कई बैठकों, प्रेस वार्ताओं और संगठनात्मक कार्यक्रमों का संचालन किया गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता नियमित रूप से इस कार्यालय का उपयोग करते रहे हैं।
पुराने मुख्यालय की जमीन को लेकर भी विवाद
TMC की संपत्ति संबंधी परेशानियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। टोपसिया रोड स्थित पार्टी के पुराने मुख्यालय को लेकर भी विवाद बना हुआ है। बागी विधायक जावेद खान ने दावा किया है कि जिस जमीन पर पार्टी का पुराना कार्यालय बना है, वह उनके परिवार की संपत्ति है।
दो महीने में भवन खाली करने का आश्वासन
मोंटू साहा ने भवन खाली कराने के फैसले के पीछे किसी राजनीतिक कारण से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि अगले दो महीनों के भीतर भवन खाली कर दिया जाएगा। साहा ने कहा, “चुनावी नतीजों के बाद यहां बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हुई थी। यदि घर को कोई नुकसान पहुंचता है तो उसका खामियाजा मुझे भुगतना पड़ेगा। यही मेरी मुख्य चिंता है।”