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The case of Maoist commander Papa Rao hiding in Bhilai for three months and learning driving
भिलाई। सन 2011 में 25 लाख रुपये के इनामी माओवादी कमांडर पापा राव ने भिलाई में तीन महीने तक गुप्त रूप से रहकर ड्राइविंग सीखने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने सामान्य व्यक्ति की तरह शहर में रहकर अपनी असली पहचान छुपाई, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को इसका पता नहीं चला।
शहर में रहकर की तैयारी
पापा राव के अनुसार, उनके पास भिलाई पहुंचने पर केवल 15 हजार रुपये थे। उन्होंने एक ड्राइविंग स्कूल में दाखिला लिया और नियमित रूप से गाड़ी चलाना सीखा। वह दिनभर अपने ठिकाने पर रहते और लोगों से बातचीत से बचते, ताकि किसी को शक न हो।
माओवादी गतिविधियों में योगदान
साक्षात्कार में पापा राव ने बताया कि उन्होंने भिलाई के हर कोने का दौरा किया और महत्वपूर्ण स्थानों की जानकारी माओवादी मुख्यालय को भेजी। उन्होंने यह भी कहा कि माओवादी संगठन में वाहन चलाने की क्षमता की कमी एक बड़ी समस्या थी, इसलिए उन्होंने खुद गाड़ी चलाना सीखा।
भिलाई से प्रस्थान और जांच
तीन महीने बाद पापा राव भिलाई से चला गया। स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। एसपी विजय अग्रवाल ने कहा कि पापा राव के दावे की पूरी जांच की जाएगी और उसके संभावित संपर्कों की पड़ताल तेज कर दी गई है।