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Uproar over the Freedom of Religion Bill 2026, Christian community protests intensify, announce Raj Bhavan siege
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 को लेकर प्रदेश में विरोध तेज हो गया है। संयुक्त मसीही समाज ने इस कानून के खिलाफ नाराजगी जताते हुए राजभवन रायपुर घेराव का ऐलान किया है। फिलहाल नवा रायपुर के तूता धरनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।
धरनास्थल पर जुटे हजारों लोग
प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे प्रदर्शनकारी विधेयक के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण है और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास है। धरनास्थल से प्रदर्शनकारी राजभवन की ओर कूच कर सकते हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
संभावित घेराव को देखते हुए पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। धरनास्थल के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और बैरिकेडिंग कर दी गई है ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
पहले भी निकाली गई थी रैली
इससे पहले भी रायपुर में मसीही समाज ने बुढ़ातालाब से अंबेडकर चौक तक रैली निकालकर विरोध जताया था। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि विधेयक में पहले जिन प्रावधानों पर आपत्ति जताई गई थी, उन्हें फिर से शामिल किया गया है।
क्या है विधेयक में प्रावधान
गृहमंत्री Vijay Sharma द्वारा पेश इस विधेयक में अवैध धर्मांतरण पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।
- दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और न्यूनतम 5 लाख जुर्माना
- महिला, नाबालिग या SC/ST वर्ग के मामलों में 10 से 20 साल तक की सजा
- सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक का प्रावधान
- दोबारा दोषी पाए जाने पर सख्त सजा
इसके अलावा, धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य होगा और बिना अनुमति धर्मांतरण को अवैध माना जाएगा।
विपक्ष और समाज की आपत्ति
विपक्ष ने भी इस बिल का विरोध करते हुए विधानसभा से वॉकआउट किया था। मसीही समाज का कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान सभी नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने “लालच” शब्द की स्पष्ट परिभाषा की मांग उठाई है।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि यह कानून बल, प्रलोभन और धोखाधड़ी के जरिए कराए जा रहे धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए लाया गया है। आदिवासी इलाकों में बढ़ते विवादों को देखते हुए इसे जरूरी बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि विधेयक में संशोधन नहीं किया गया, तो वे न्यायालय का रुख करेंगे और राज्यभर में आंदोलन तेज करेंगे।